लाइव न्यूज़ :

Live in Relationship: अगर जोड़ा 48 घंटे के भीतर यूसीसी पंजीकृत है तो सुरक्षा दीजिए, ‘लिव-इन’ में रह रहे अंतरधार्मिक जोड़े पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दिया फैसला

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 20, 2024 12:49 IST

Live in Relationship Rules in India: न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने शुक्रवार को याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि अगर याचिकाकर्ता 48 घंटों के भीतर पंजीकरण के लिए आवेदन करते हैं, तो संबंधित थानाध्यक्ष छह सप्ताह के लिए उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध करवाएंगे।

Open in App
ठळक मुद्देLive in Relationship Rules in India: परिवार वालों से डरकर उन्होंने उच्च न्यायालय की शरण ली है।Live in Relationship Rules in India: अधिनियम में विवाह और लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।Live in Relationship Rules in India: पंजीकरण नहीं करवाते, तो इसके लिए जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है।

Live in Relationship Rules in India: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ‘लिव-इन’ में रह रहे एक अंतरधार्मिक जोड़े की ओर से अपनी सुरक्षा के लिए दायर याचिका पर आदेश दिया है कि अगर जोड़ा खुद को 48 घंटे के भीतर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत पंजीकृत करवाता है, तो उसे आवश्यक सुरक्षा दी जाएगी। हांलांकि, सरकारी वकील ने स्पष्ट किया कि मामले में पेश हुए कनिष्ठ सरकारी वकील को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उत्तराखंड में यूसीसी की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। सरकारी वकील ने कहा, “अब अदालत के आदेश में से यूसीसी वाले हिस्से को निकालने के बाद संशोधित आदेश जारी किया जाएगा। इसके लिए शनिवार को एक रिकॉल याचिका दायर की जाएगी। हालांकि, इस बीच युगल को सुरक्षा प्रदान की जाएगी।”

इस साल फरवरी में उत्तराखंड विधानसभा से पारित यूसीसी अधिनियम में प्रदेश में रहने वाले सभी धर्म-समुदाय के नागरिकों के लिए विवाह, संपत्ति, गुजारा भत्ता और विरासत के लिए एक समान कानून लागू करने का प्रावधान है। अधिनियम में विवाह और लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

अधिनियम को प्रदेश के राज्यपाल और राष्ट्रपति दोनों से मंजूरी मिल चुकी है तथा उसे लागू करने के लिए नियमावली तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस से पहले प्रदेश में यूसीसी लागू करने की बात कह चुके हैं। मामले में लिव-इन संबंध में रह रही 26 वर्षीय हिंदू युवती और 21 वर्षीय मुसलमान युवक ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर कहा था कि वे दोनों बालिग हैं और अलग-अलग धर्म को मानते हैं, लेकिन अपने परिवार वालों से डरकर उन्होंने उच्च न्यायालय की शरण ली है।

सरकारी वकील ने उत्तराखंड यूसीसी की धारा 378 (1) का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपने बारे में जानकारी देते हुए रजिस्ट्रार के सामने अपना रिश्ता पंजीकृत कराना जरूरी है। वकील ने यह भी कहा कि संबंध जुड़ने के एक महीने के भीतर अगर वे उसका पंजीकरण नहीं करवाते, तो इसके लिए जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने शुक्रवार को याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि अगर याचिकाकर्ता 48 घंटों के भीतर पंजीकरण के लिए आवेदन करते हैं, तो संबंधित थानाध्यक्ष छह सप्ताह के लिए उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध करवाएंगे। हालांकि, यूसीसी की अधिसूचना जारी न होने के मद्देनजर पंजीकरण वाले हिस्से में बदलाव के लिए शनिवार को रिकॉल याचिका दाखिल की जाएगी। 

टॅग्स :उत्तराखण्डहाई कोर्ट
Open in App

संबंधित खबरें

भारतकौन थे भुवन चंद्र खंडूरी?, देहरादून में निधन

पूजा पाठपंच केदार तीर्थयात्राः रहिए तैयार, 18 मई को खुलेंगे श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट, पवित्र डोली धार्मिक मंत्रोच्चार, पुष्प वर्षा और गढ़वाल राइफल्स सेना बैंड द्वारा बजाई गई धुनों के बीच रवाना

ज़रा हटकेकॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यानः हथिनी ने स्वस्थ जुड़वां शावकों को जन्म दिया?, बेहद दुर्लभ घटना मान रहे वन्यजीव विशेषज्ञ, वीडियो

भारतDhar Bhojshala Dispute: वाग्देवी मंदिर, हवन कुंड, मूर्तिकला और संस्कृत शिलालेख?, भोजशाला में सबूत और हिन्दू पक्ष ने जीत ली बाजी?

भारतमप्र उच्च न्यायालय ने धार स्थित भोजशाला को मंदिर घोषित किया, हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार भी दिया?

भारत अधिक खबरें

भारत'चंद दिनों के बलात्कार और दुष्कर्म के चंद आंकड़े दे रहा हूँ': नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आंकड़े जारी कर सम्राट सरकार पर बोला तीखा हमला

भारतविकास प्रक्र‍िया में जनजातीय समाज को शामिल करने प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बनाई नीतियां: मंत्री डॉ. शाह

भारतक्या बीजेपी में शामिल होंगे रेवंत रेड्डी? तेलंगाना सीएम को लेकर निज़ामाबाद के सांसद धर्मपुरी के बयान ने मचाई सनसनीखेज

भारत2020 Delhi riots case: अदालत ने बीमार माँ की देखभाल के लिए उमर खालिद को अंतरिम ज़मानत देने से किया इनकार

भारतइंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा सहित मप्र के पांच कलेक्टर फेम इंडिया-एशिया पोस्ट की सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026 सूची में शामिल