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गुजरात के बाद कर्नाटक में भी पाठ्यक्रम में भगवद् गीता शामिल करने की तैयारी, कांग्रेस ने बताया गैरजरूरी कदम

By विशाल कुमार | Updated: March 19, 2022 08:08 IST

प्रदेश कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने सरकार की योजना का विरोध करते हुए कहा कि रामायण और अन्य महाकाव्यों के अंश पहले से ही स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा थे।

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ठळक मुद्देगुजरात के कक्षा 6 के स्कूली पाठ्यक्रम में भगवद् गीता शामिल करने का फैसला किया गया है।कर्नाटक के शिक्षा मंत्री ने दावा किया कि बच्चों के बीच सांस्कृतिक मूल्यों का क्षरण हुआ है।प्रदेश कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने सरकार की योजना का विरोध किया।

बेंगलुरू:गुजरात के स्कूली पाठ्यक्रम में भगवद् गीता को शामिल किए जाने के फैसले के बाद कर्नाटक सरकार ने ऐसे ही संकेत दिए हैं और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने शुक्रवार को कहा कि ऐसा कोई भी निर्णय करने से पहले राज्य सरकार शिक्षाविदों के साथ चर्चा करेगी। 

नागेश ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘गुजरात में नैतिक विज्ञान को पाठ्यक्रमों में तीन से चार चरणों में शामिल करने फैसला किया गया है। पहले चरण में वे भगवद् गीता को शामिल करेंगे। यह बात मेरे संज्ञान में आई है। हम नैतिक विज्ञान को पाठ्यक्रम में शामिल करने के संदर्भ में मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई से चर्चा करने के बाद कोई फैसला करेंगे।’’ 

मंत्री ने दावा किया कि बच्चों के बीच सांस्कृतिक मूल्यों का क्षरण हुआ है। उनका कहना था कि बहुत सारे लोगों ने मांग की है कि नैतिक विज्ञान की पढ़ाई शुरू की जाए। 

नागेश के अनुसार, पहले सप्ताह में एक कक्षा नैतिक विज्ञान की होती थी जिसमें रामायण और महाभारत से संबंधित अंश पढ़ाए जाते थे। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी भी अपने बचपन की शिक्षा का श्रेय रामायण और महाभारत को देते थे। जब वह बड़े हुए तो राजा हरिश्चंद्र का उनके जीवन पर बहुत बड़ा असर हुआ। 

मंत्री ने कहा कि उन चीजों को पाठ्यक्रम में शामिल करना हमारा कर्तव्य है जिनका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

वहीं, प्रदेश कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने सरकार की योजना का विरोध करते हुए कहा कि रामायण और अन्य महाकाव्यों के अंश पहले से ही स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा थे। 

उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम को बदलने या गीता जैसे नए अध्यायों को स्कूल के पाठ्यक्रम में जोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है। लोगों को सभी धर्मों की संस्कृति के बारे में जानने का अधिकार है। यह गलत नहीं है, लेकिन अब पूरी गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोई जरूरत नहीं है।

शिवकुमार ने भाजपा द्वारा पाठ्यक्रम में गीता को पेश करने का श्रेय लेने पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री केंगल हनुमंतैया ने पवित्र पुस्तक की प्रतियां वितरित की थीं।

टॅग्स :कर्नाटकभगवत गीताBJPकांग्रेसगुजरात
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