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जम्मू-कश्मीर: आतंकी कर रहे रहे हैं मानवीय संवेदना की एक और हद पार, हत्या कर लाश नहीं दे रहे, आडियो संदेश कर रहे हैं जारी

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: August 24, 2020 14:39 IST

कश्मीर में इन दिनों आतंकियों ने हत्या के साथ-साथ पीड़ित के शव को परिजनों को नहीं सौंप कर लोगों को परेशान करने का एक नया तरीका खोज निकाला है। एक पखवाड़े में ऐसे दो मामले सामने आ चुके हैं।

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ठळक मुद्देकश्मीर में आतंकियों ने मानवीय संवेदना की एक और हद पार कर दी हैआतंकी हत्या के बाद पीड़ित का शव नहीं दे रहे हैं परिजनों को, हाल में दो मामले आ चुके हैं सामने

जम्मू: कश्मीरी जनमानस आतंकियों की उस नीति से परेशान होने लगा है जिसमें वे लोगों को अगवा कर उनकी ‘हत्या’ करने के बाद शव भी नहीं दे रहे हैं। ऐसे दो मामले पिछले एक पखवाड़े में आ चुके हैं।

कश्मीरी आतंकियों से शव देने की अपील कर रहे हैं, पर वे कहते हैं कि शव देने से कश्मीरियों का ही नुक्सान होगा क्योंकि कोरोनाकाल में ज्यादा भीड़ होने से लोग संक्रमित हो जाएंगें।

ताजा मामला श्रीनगर के खानमोह के उस पंच का है जो दो दिन पहले शोपियां के चाकूरा से लापता हो गया था। अब एक आडियो क्लिप में आतंकी दावा कर रहे हैं कि उसे अगवा करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई है और शव दफना दिया गया है।

आतंकियों के अनुसार, पंच का शव उनके परिजनों को इसलिए नहीं दिया गया है ताकि कश्मीरियों को कोरोना से बचाया जा सके।

ऐसा ही एक संदेश आतंकियों ने 9 अगस्त को भी जारी किया था जिसमें कुलगाम के प्रादेशिक सेना के जवान शाकिर मंजूर की हत्या के प्रति दावा किया गया था। हालांकि अभी भी पुलिस दोनों आडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करती है।

पर अगवा किए गए सेना के जवान के घरवाले अब इसे सच मानने लगे हैं क्योंकि 3 अगस्त की रात को आतंकियों ने शाकिर मंजूर का अपहरण कर लिया था और अभी तक सुरक्षाबल उसकी तलाश नहीं कर पाए हैं।

छह दिनों के बाद उसकी हत्या किए जाने का ऑडियो वायरल हुआ तो उसके परिजनों ने उसके शव की मांग करते हुए अपील की। पर आतंकियों ने शव देने से इंकार करते हुए कहा कि ऐसा करने से लोग कोरोना की चपेट में आ जाएंगें।

वैसे कश्मीर में आतंकियों के शव भी अब उनके परिजनों को नहीं सौंपे जा रहे। सुरक्षाबलों को डर है कि उनके जनाजों में एकत्र होने वाली भीड़ लोगों की भावनाओं केा भड़का रही है। यह सच भी है। और कोरोना फैलने के बाद तो कोरोना से मरने वालों के शव भी उनके परिजनों को इस डर से नहीं दिए जा रहे हैं ताकि लोगों को कोरोना से बचाया जा सके।

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