लाइव न्यूज़ :

जम्मू कश्मीर: अनुच्छेद 370 रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जुलाई में सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 25, 2022 12:34 IST

वरिष्ठ वकील शेखर नफड़े ने सोमवार को सीजेआई एनवी रमना और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ के सामने मामले का उल्लेख किया। नफड़े ने जम्मू कश्मीर में जारी मौजूदा परिसीमन अभ्यास का हवाला देते हुए मामले को कम से कम ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सूचीबद्ध करने की मांग की।

Open in App
ठळक मुद्देमौजूदा परिसीमन अभ्यास का हवाला देते हुए मामले को सूचीबद्ध करने की मांग की गई।सीजेआई ने कहा कि मुझे पांच जजों की पीठ का पुनर्गठन करना होगा।अनुच्छेद 370 को रद्द करके केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को रद्द कर दिया था।

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्टजम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किये जाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जुलाई में सुनवाई करेगा।

वरिष्ठ वकील शेखर नफड़े ने सोमवार को सीजेआई एनवी रमना और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ के सामने मामले का उल्लेख किया। नफड़े ने जम्मू कश्मीर में जारी मौजूदा परिसीमन अभ्यास का हवाला देते हुए मामले को कम से कम ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सूचीबद्ध करने की मांग की।

इस पर, सीजेआई ने कहा कि मैं देखता हूं। यह पांच न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष रखा जाने वाला मामला है। मुझे पीठ का पुनर्गठन करना होगा।

2019 में याचिकाओं को जस्टिस एन वी रमना, संजय किशन कौल, आर सुभाष रेड्डी, बीआर गवई और सूर्य कांत की संविधान पीठ को भेजा गया था। बेंच के सदस्यों में से एक जस्टिस सुभाष रेड्डी इस साल जनवरी में सेवानिवृत्त हुए थे।

बता दें कि, संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र सरकार के अगस्त 2019 के फैसले को चुनौती देने वाली 20 से अधिक याचिकाएं शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित हैं।

अनुच्छेद 370 को रद्द करके केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को रद्द कर दिया था। इसके बाद, राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर।

मार्च 2020 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने माना था कि अनुच्छेद 370 को चुनौती देने वाली याचिकाओं के बैच को 7 जजों की संविधान पीठ को संदर्भित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। याचिकाओं को 2 मार्च, 2020 के बाद सूचीबद्ध नहीं किया गया है।

टॅग्स :धारा 370जम्मू कश्मीरसुप्रीम कोर्टमोदी सरकार
Open in App

संबंधित खबरें

भारतकुत्तों के काटने की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता?, सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और अस्पतालों के पास आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश को बरकरार रखा?

भारतजमानत नियम और जेल अपवाद, यूएपीए मामले में भी यही नियम?, सुप्रीम कोर्ट ने हंदवाड़ा निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को दी राहत, पासपोर्ट जमा करने और हर 15 दिन में एक बार थाने जाओ?

भारतदिल्ली बार काउंसिल चुनावः मतगणना पर रोक, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा- न्यायालय फैसला नहीं सुनाता, तब तक मतपत्रों की गिनती स्थगित

भारतकभी किसी के विचारों पर आत्मावलोकन भी तो हो!

भारतसुंबली मावस उत्सव: घाटी में गूंजी पुरानी आवाजें, 37 साल बाद कश्मीरी पंडितों ने अपनी मिट्टी को चूमा

भारत अधिक खबरें

भारतईमानदारी के अभाव में शातिर बन जाती है समझदारी

भारत"सरकार हर आयोजन को सड़क पर करा रही है": सड़कों पर नमाज को लेकर सीएम योगी पर अखिलेश का पलटवार

भारतUjjain: श्री महाकाल मंदिर सभा मंडप में सफाई कर्मी महिला को कुत्ते ने काटा

भारत'चंद दिनों के बलात्कार और दुष्कर्म के चंद आंकड़े दे रहा हूँ': नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आंकड़े जारी कर सम्राट सरकार पर बोला तीखा हमला

भारतविकास प्रक्र‍िया में जनजातीय समाज को शामिल करने प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बनाई नीतियां: मंत्री डॉ. शाह