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अर्नब गोस्वामी की जमानत याचिका पर बुधवार को शीर्ष अदालत में सुनवाई

By भाषा | Updated: November 10, 2020 20:14 IST

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नयी दिल्ली, 10 नवंबर उच्चतम न्यायालय आत्महत्या के लिये उकसाने के आरोप में गिरफ्तार रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत के लिये दायर अपील पर बुधवार को सुनवाई करेगा।

न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ अर्नब गोस्वामी की अपील पर सुनवाई करेगी।

रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक को अंतरिम जमानत देने से इंकार करने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अर्नब की अपील दायर होने के कुछ घंटों के भीतर ही शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री ने इसे 11 नवंबर को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया।

अधिवक्ता निर्निमेष दुबे के माध्यम से दायर इस अपील पर न्यायालय सुबह साढ़े दस बजे सुनवाई करेगा।

बंबई उच्च न्यायालय ने नौ नवंबर को अर्नब गोस्वामी और दो अन्य को अंतरिम जमानत देने से इंकार करते हुये कहा था कि उन्हें राहत के लिये निचली अदालत जाना चाहिए। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि अगर आरोपी अपनी ‘गैरकानूनी गिरफ्तारी’ को चुनौती देते हैं और जमानत की अर्जी दायर करते हैं तो संबंधित निचली अदालत चार दिन के भीतर उस पर निर्णय करेगी।

अर्णब ने शीर्ष अदालत में दायर अपील में महाराष्ट्र सरकार के साथ ही अलीबाग थाने के प्रभारी, मुंबई के पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह को भी पक्षकार बनाया है।

इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने भी अपने अधिवक्ता सचिन पाटिल के माध्यम से न्यायालय में कैविएट दाखिल की है ताकि उनका पक्ष सुने बगैर गोस्वामी की याचिका पर कोई आदेश नहीं दिया जाये।

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के अलीबाग थाने की पुलिस ने चार नवंबर को, इंटीरियर डिजायनर की कंपनी की बकाया राशि का कथित रूप से भुगतान नहीं करने के कारण अन्वय नाइक और उनकी मां को कथित रूप से आत्महत्या के लिये बाध्य करने के मामले में, अर्नब को गिरफ्तार किया था।

उच्च न्यायालय का अंतरिम राहत के मामले में फैसला आने से पहले ही अर्नब ने अपनी नियमित जमानत के लिये अलीबाग की सत्र अदालत में आवेदन दायर कर दिया था।

उच्च न्यायालय ने गोस्वामी और दो अन्य आरोपियों फिरोज शेख और नितीश सारदा की अंतरिम जमानत के आवेदन अस्वीकार करते हुये कहा था कि यह असाधारण अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल का कोई मामला नहीं बनता है।

यह प्राथमिकी निरस्त करने के लिये दायर याचिका पर उच्च न्यायालय 10 दिसंबर को सुनवाई करेगा।

गोस्वामी सहित तीनों आरोपियों को चार नवंबर को देर रात एक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था जिन्होंने उन्हें पुलिस हिरासत में देने से इंकार करते हुये 18 नवंबर तक के लिये न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

गोस्वामी को शुरू में अलीबाग जेल के लिये बनाये गये कोविड-19 पृथकवास में रखा गया था लेकिन कथित रूप से मोबाइल इस्तेमाल करते पाये जाने के कारण उन्हें रायगढ़ की तलोजा जेल शिफ्ट कर दिया गया।

इस बीच, रिपब्लिक टीवी के कंसल्टिंग संपादक प्रदीप भंडारी ने रविवार को प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे को एक पत्र लिखकर गोस्वामी को तलोजा जेल स्थानांतरित किये जाने और खतरनाक अपराधियों के बीच रखे जाने का संज्ञान लेने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह किया था।

उनका कहना था कि गोस्वामी की जान को खतरा है और उन्हें रविवार की सुबह पीटा गया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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