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वैश्विक शक्तियों ने तालिबान को मंच दिया, महिलाओं के लिए स्थिति भयावह: मेरी अकरमी

By भाषा | Updated: August 17, 2021 16:47 IST

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अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति को ‘भयावह’ करार देते हुए अफगान वूमेन नेटवर्क की कार्यकारी निदेशक मेरी अकरमी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय खासकर अमेरिका ने तालिबान को वहां फिर से सत्ता हासिल करने के जरूरी मंच एवं मान्यता प्रदान की। उन्होंने काबुल से फोन पर साक्षात्कार के दौरान कहा कि वैश्विक समुदाय की चुप्पी से निराश एवं मायूस अफगान आशावान हैं कि भारत शांति दूत बनेगा एवं संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘ भारत को अच्छे पड़ोसी एवं मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए और उसे अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा रहना चाहिए। बतौर महिला एवं इंसान मैं भारत सरकार को शांतिदूत की भूमिका निभाने की सलाह दूंगी। ’’ अकरमी ने पीटीआई-भाषा से कहा , ‘‘ लेकिन सबसे पहले, भारत और पाकिस्तान को अपनी समस्याएं हल करनी चाहिए क्योंकि अफगानिस्तान ने उनके बीच के मुद्दों के चलते काफी कुछ झेला है। ’’ अमेरिका नीत सैन्यबलों के हटने के बाद युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में तालिबान ने त्वरित कार्रवाई के तहत अपनी पकड़ मजबूत कर ली। उसने 20 साल बाद रविवार को काबुल को नियंत्रण में ले लिया। उसे 9/11 हमले के बाद अमेरिका नीत सैन्य हमले में 20 पहले सत्ता से हटाया गया था। अफगानिस्तान की राजधानी पर तालिबान के कब्जे के बीच अफगान राजनयिक, राष्ट्रपति अशरफ गनी एवं उनके करीबियों समेत बड़ी संख्या लोग देश छोड़कर चले गये। अकरमी ने कहा , ‘‘ अंतरराष्ट्रीय समुदाय खासकर अमेरिका ने तालिबान को वहां फिर से सत्ता हासिल करने के जरूरी मंच एवं मान्यता प्रदान की। अचानक... तालिबान को इतना बड़ा मंच प्रदान करना अमेरिका सरकार की सबस बड़ी गलतियों में एक थी। न तो पड़ोसी देशों ने और न ही दुनिया के किसी अन्य देश ने उसपर ऐतराज किया।’’ जमीनी स्तर पर जो कुछ हो रहा है, उसे बयां करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति ‘महिलाओं के लिए भयावह है’ क्योंकि बिना महरम (पुरुष संरक्षक) के घर से निकलने पर महिलाओं के साथ मार-पीट की कई घटनाएं सामने आयी हैं , भले ही वे स्वास्थ्यकेंद्र ही क्यों न जा रही हों। उन्होंने कहा, ‘‘ दुकानों को बिना महरम वाली महिलाओं को सामान बेचने से मना कर दिय गया है। तालिबान ने उसके लड़ाकों को खाना खिलाये जाने का आदेश दिया है , अन्यथा सजा भुगतने को कहा है। ’’ अकरमी ने कहा कि महिलाओं के लिए सख्त अति चरमपंथी पितृसत्तामक आचार संहिता का पालन करने वाले इस्लामिक उग्रवादियों ने ग्राम प्रधानों एवं मुल्लाओं को 15 साल से अधिक उम्र की लड़कियों तथा 45 साल से कम उम्र की विधवाओं की पहचान करने को कहा है ताकि उनकी शादी लड़ाकों से की जा सके। उन्होंने कहा , ‘‘ तालिबान ने यहां कामकाजी महिलाओं से कहा कि वे अपने कार्यालय नहीं जा सकती हैं। ’’उन्होंने कहा कि गाने सुनने या टीवी देखने पर रोक लगा दी गयी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र एवं वैश्विक शक्तियों तथा भारत एवं ईरान जैसे देशों की ऐसे वक्त पर चुप्पी पर सवाल उठाया जब उनका देश ऐसे संकट से गुजर रहा है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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