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दिल्ली सेवा बिल पर पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा- 'मेरे लिए बिल सही है', सदन में चर्चा जारी

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: August 7, 2023 18:27 IST

राज्यसभा में सोमवार को ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक’ पर चर्चा हुई। इस दौरान राज्यसभा सांसद और पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि मेरे लिए बिल सही है।

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ठळक मुद्देराज्यसभा में ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक’ पर चर्चा जारीपूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि मेरे लिए बिल सही हैइससे पहले सदन में गर्मा गर्म बहस भी हुई

नई दिल्ली: राज्यसभा में सोमवार को ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक’ पर चर्चा हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक, 2023 को चर्चा के लिए रखा। इसके बाद तमाम सदस्यों ने इसके पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे। हालांकि बहस के बीच सबसे ज्यदा चर्चा पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के भाषण की हुई। 

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 पर राज्यसभा सांसद और पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि मेरे लिए बिल सही है। पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जो लंबित है वह अध्यादेश की वैधता है। और दो प्रश्न संविधान पीठ को भेजे गए हैं और इसका सदन में बहस से कोई लेना-देना नहीं है।

इससे पहले सदन में गर्मा गर्म बहस भी हुई। भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि  दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है तथा संसद को दिल्ली के संबंध में कानून बनाने का पूरा अधिकार है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 105 पन्नों के फैसले में कहीं भी दिल्ली पर कानून पारित करने के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा गया है… सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पैराग्राफ 86, 95 और 164 F में कहा गया है कि संसद को दिल्ली के लिए कानून बनाने के सारे अधिकार हैं। 

कांग्रेस पार्टी के नेता अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा कि बीजेपी का दृष्टिकोण किसी भी तरह से नियंत्रण करने का है…यह विधेयक पूरी तरह से असंवैधानिक है, यह मौलिक रूप से अलोकतांत्रिक है, और यह दिल्ली के लोगों की क्षेत्रीय आवाज और आकांक्षाओं पर एक प्रत्यक्ष हमला है। यह संघवाद के सभी सिद्धांतों, सिविल सेवा जवाबदेही के सभी मानदंडों और विधानसभा-आधारित लोकतंत्र के सभी मॉडलों का उल्लंघन करता है।

आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राघव चड्ढा ने सदन में कहा कि दिल्ली सरकार में वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग पर अध्यादेश को बदलने का विधेयक एक राजनीतिक धोखाधड़ी, संवैधानिक पाप है और एक प्रशासनिक गतिरोध पैदा करेगा। चड्ढा ने कहा कि भाजपा लगभग 40 वर्षों से दिल्ली को राज्य का दर्जा देने की मांग कर रही है और अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी इसका वादा किया है।

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