लाइव न्यूज़ :

दुर्लभ बीमारी 'गौचर' से पीड़ित बच्ची, परिवार खर्च रहा 3.50 लाख प्रतिमाह, हाई कोर्ट ने AIIMS को दिया 'मुफ्त इलाज' का आदेश

By भाषा | Updated: March 25, 2020 16:05 IST

बच्ची के पिता के वकील ने अदालत से कहा कि इस बीमारी के उपचार पर हर महीने करीब साढ़े तीन लाख रूपए खर्च आता है। अदालत ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि इस बीमारी के इलाज का खर्च उसका परिवार नहीं उठा सकता है।

Open in App
ठळक मुद्देआनुवांशिक विकार है ‘गौचर’। दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों और उनके उपचार के बारे में अभी कोई नीति नहीं।परिवार को इलाज के लिए करना पड़ रहा करीब साढ़े तीन लाख रुपए खर्च प्रतिमाह खर्च।

उच्च न्यायालय ने एम्स को निर्देश दिया है कि दुर्लभ बीमारी ‘गौचर’ से पीड़ित डेढ़ साल की बच्ची का उसके पिता से एक भी पैसा लिये बगैर इलाज किया जाए। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने अपने आदेश में इस तथ्य का उल्लेख किया है कि दुर्लभ किस्म की बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों का इलाज करने के बारे में कोई नीति है। अदालत ने इसके साथ ही ऐसी दुर्लभ बीमारियों से निबटने के लिये सरकार की मौजूदा नीति के बारे में 17 अप्रैल तक हलफनामा दाखिल करने का केन्द्र को निर्देश दिया है।

अदालत ने 23 मार्च को अपने आदेश में कहा कि इस बच्ची का उपचार तत्काल शुरू करने के अनुरोध के साथ इस आदेश की प्रति अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक और निदेशक को भेजी जाये। अदालत गौचर बीमारी से पीड़ित बच्ची के पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिका में बच्ची के इलाज के लिये धन और इस संबंध में उचित निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। याचिका के अनुसार बच्ची के इलाज के संबंध में सरकार को अनेक प्रतिवेदन दिये गये लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला है। बच्ची के पिता के वकील ने अदालत से कहा कि इस बीमारी के उपचार पर हर महीने करीब साढ़े तीन लाख रुपए खर्च आता है। अदालत ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि इस बीमारी के इलाज का खर्च उसका परिवार नहीं उठा सकता है।

अदालत को बताया गया कि अमेरिका और यूरोपीय यूनियन में ‘अनाथ बीमारी’ के रूप में ‘गौचर’ बीमारी का इलाज किया जा चुका है। यह एक आनुवांशिक विकार है। अदालत को यह भी बताया कि केन्द्र सरकार ने 2018 में दुर्लभ बीमारियों के उपचार की नीति तैयार की थी लेकिन कतिपय राज्य सरकारों की आपत्ति के कारण इसे कथित रूप से रद्द कर दिया गया।

दुर्लभ बीमारियों के उपचार की नीति का मसौदा दस्तावेज 13 जनवरी, 2020 को जारी किया गया था। अदालत ने कहा कि यह नीति अभी तक लागू नहीं हुयी है। इस तथ्य को देखते हुये ऐसा लगता है कि दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों और उनके उपचार के बारे में अभी कोई नीति नहीं है।

टॅग्स :हाई कोर्टएम्सदिल्लीअमेरिका
Open in App

संबंधित खबरें

भारतदिल्ली में सफर पर लगेगा ब्रेक? 21 मई से तीन दिन तक ऑटो-टैक्सी की हड़ताल, किराया बढ़ाने की मांग पर अड़े ड्राइवर

विश्वराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा, ताइवान का जिक्र नहीं?, व्हाइट हाउस ने फैक्ट शीट जारी किया

विश्वतेलंगाना की रहने वाली 25 वर्षीय नव्या गडुसु की मौत और सड़क दुर्घटना में 6 घायल 

भारतओडिशा भीषण गर्मीः बौध शहर में 42.9 डिग्री सेल्सियस?, 11 स्थानों पर अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज

विश्वतेहरान में 90 मिनट तक बैठक?, अमेरिका-इजराइल के साथ टकराव के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ उच्च स्तरीय वार्ता

भारत अधिक खबरें

भारतईमानदारी के अभाव में शातिर बन जाती है समझदारी

भारत"सरकार हर आयोजन को सड़क पर करा रही है": सड़कों पर नमाज को लेकर सीएम योगी पर अखिलेश का पलटवार

भारतUjjain: श्री महाकाल मंदिर सभा मंडप में सफाई कर्मी महिला को कुत्ते ने काटा

भारत'चंद दिनों के बलात्कार और दुष्कर्म के चंद आंकड़े दे रहा हूँ': नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आंकड़े जारी कर सम्राट सरकार पर बोला तीखा हमला

भारतविकास प्रक्र‍िया में जनजातीय समाज को शामिल करने प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बनाई नीतियां: मंत्री डॉ. शाह