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मीरवायज की ‘नजरबंदी’ पर बढ़ा विवाद, उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के बयान पर हुर्रियत ने निशाना साधा

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: August 20, 2022 15:50 IST

जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल ने बीबीसी को दिए गए एक साक्षात्कार में दावा किया था कि मीरवायज उमर फारूक न ही बंद हैं और न ही नजरबंद। उपराज्यपाल के इस बयान के बाद विवाद और बढ़ गया है। हुर्रियत की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि ऐसा कभी संभव नहीं हो सकता कि कश्मीरियों के नेता मीरयावज अपने आप ही घर में बंद होकर रहें।

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ठळक मुद्देजम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल ने मीरवायज को न ही बंदी माना है और न नजरबंदपांच अगस्त 2019 से ही घर में कैद हैं हुर्रियत नेता मीरवायजमीरवायज को लेकर विवाद बढ़ गया है

जम्मू: क्या कोई नेता या व्यक्ति लगातार तीन सालों तक अपनी मर्जी और खुशी से अपने आपको घर में कैद रख सकता है। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा हुर्रियत कांफ्रेंस नेता मीरवायज उमर फारूक की ‘नजरबंदी’ के प्रति दिए गए वक्तव्य के बाद सवाल उठने लगे हैं तथा विवाद और बढ़ गया है।इस बयान पर बवाल इसलिए मचा है क्योंकि कल उप राज्यपाल ने बीबीसी को दिए गए एक साक्षात्कार में दावा किया कि मीरवायज उमर फारूक न ही बंद हैं और न ही नजरबंद। यही नहीं उनका वह बयान हास्यास्पद बन गया है कि मीरवायज के घर के बाहर तैनात पुलिसकर्मी उनकी नजरबंदी के लिए नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा की खातिर तैनात किए गए हैं।

पांच अगस्त को राज्य के दो टुकड़े करने और उसकी पहचान खत्म किए जाने की कवायद के दिन ही अन्य नेताओं की तरह मीरवायज उमर फारूक को उनके घर पर नजरबंद कर दिया गया था। इस नजरबंदी के दौरान न ही उन्हें घर से बाहर जाने की अनुमति दी गई और न ही किसी को उनसे मिलने दिया गया। पर सरकार ऐसा नहीं मानती। सरकार कहती है कि वे अपनी ‘मर्जी ’ से घर के भीतर हैं।

सरकार का यह बयान हास्यास्पद लगता है क्योंकि हुर्रियत की ओर से कल जारी वक्तव्य में कहा गया है कि ऐसा कभी संभव नहीं हो सकता कि कश्मीरियों के नेता मीरयावज अपने आप ही घर में बंद होकर रहें। दरअसल कश्मीर में शांति बहाल करने और शांति बनाए रखने की कवायद के तहत ही मीरवायज उमर फारूक को प्रशासन खतरा इसलिए मानता रहा है क्योंकि उसे लगता था कि जन समर्थन उनके साथ है और वे लोगों की विचारधारा को प्रभावित कर कश्मीर में कानून व व्यवस्था की समस्या उत्पन्न कर सकते हैं।

अब जबकि उप राज्यपाल ने मीरवायज को न ही बंदी माना है और न नजरबंद तो इसे उनकी रिहाई के तौर पर लेने वाली हुर्रियत का कहना था कि अगर मीरवायज सच में आजाद हैं तो उन्हें इस शुक्रवार को जामा मस्जिद में धार्मिक समारोह में शिरकत की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि मीरवायज एक धार्मिक नेता हैं।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरमनोज सिन्हाMirwaiz Umar FarooqHurriyat Conference
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