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बिहार में सक्रिय गिरोहों का डाटाबेस तैयार कर उनकी गतिविधियों पर रखी जा रही है नजर, 22 अप्रैल 2026 तक पुलिस ने कुल 10 मुठभेड़ किए

By एस पी सिन्हा | Updated: April 27, 2026 16:52 IST

खासतौर पर भू-माफियाओं और अवैध कमाई के मामलों में कार्रवाई करते हुए संपत्तियों की पहचान कर पीएमएलए के तहत जब्ती के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। 

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पटना: बिहार में संगठित अपराध के खिलाफ जिलावार विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही सक्रिय गिरोहों का डाटाबेस तैयार कर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। खासतौर पर भू-माफियाओं और अवैध कमाई के मामलों में कार्रवाई करते हुए संपत्तियों की पहचान कर पीएमएलए के तहत जब्ती के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। 

पुलिस मुख्यालय में सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार एसटीएफ के डीआईजी संजय कुमार सिंह और नीरज कुमार ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि, 1 जनवरी से 22 अप्रैल 2026 के बीच अपराधियों और नक्सलियों के खिलाफ कई अहम कार्रवाई की गई हैं। जिनसे आपराधिक नेटवर्क पर असर पड़ा है। 

अधिकारियों ने बताया कि 1 जनवरी 2026 से 22 अप्रैल 2026 तक पुलिस ने कुल 10 मुठभेड़ (एनकाउंटर) किए, जिनमें 3 अपराधी मारे गए जबकि 7 घायल हुए। पुलिस के द्वारा दावा किया गया कि, इन अभियानों के जरिए कई कुख्यात अपराधियों के नेटवर्क को कमजोर किया गया है। जिससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिली है। 

इसके साथ ही नक्सल विरोधी अभियान के तहत उल्लेखनीय सफलता भी मिली है। 3 लाख के इनामी नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की। इसके अलावा 2 लाख के इनामी अपराधी दीपक पांडेय ने भी सरेंडर किया। अधिकारियों के मुताबिक, इससे नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने में बड़ी सफलता मिली है। 

अधिकारी द्वय ने बताया कि सीमावर्ती जिलों सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पश्चिमी चंपारण और पूर्वी चंपारण में विशेष अभियान चलाया गया। नारकोटिक्स सेल ने हेरोइन, गांजा, अफीम और कोडीन सिरप की बड़ी खेप बरामद कर कई तस्करों को गिरफ्तार किया। ड्रोन की मदद से एरियल सर्विलांस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप द्वारा छापेमारी कर नेटवर्क पर निगरानी रखी जा रही है। एसटीएफ की तैनाती बढ़ाकर इन इलाकों में नियंत्रण और मजबूत किया गया है। 

उन्होंने बताया कि जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच एसटीएफ ने हत्या, लूट और डकैती जैसे 38 संगीन मामलों में प्रभावी कार्रवाई करते हुए अपराध पर नियंत्रण स्थापित किया है। पुलिस बल की क्षमता बढ़ाने के लिए एसटीएफ ने 1407 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया। इसमें 1145 कर्मियों को एसटीएफ प्रशिक्षण शाखा और 262 को अन्य इकाइयों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया, जिससे तकनीकी और ऑपरेशनल दक्षता में सुधार हुआ है। 

अधिकारियों के अनुसार साइबर अपराध के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई है। एटीएम फ्रॉड, बैंक लोन फ्रॉड और एपीआई के जरिए डेटा बिक्री से जुड़े कुल 11 मामलों का खुलासा किया गया है। इन कार्रवाईयों से साइबर अपराध नेटवर्क पर नियंत्रण और आम लोगों के वित्तीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

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