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1 अप्रैल से महंगी होंगी दवाइयां; पेनकिलर और एंटीबायोटिक के लिए देने होंगे इतने रुपये, जानें कितनी ढीली होगी जेब

By अंजली चौहान | Updated: March 26, 2026 10:24 IST

Medicines Price Hike: 1 अप्रैल से आवश्यक दवाओं की कीमतों में 0.6% की वृद्धि होगी। यह वृद्धि थोक मूल्य सूचकांक में होने वाले वार्षिक परिवर्तनों के अनुरूप है। राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल लगभग 1,000 दवाएं इससे प्रभावित होंगी।

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Medicines Price Hike: एक अप्रैल से आम आदमी की जेब पर और अधिक भार पड़ने वाला है क्योंकि कई दवाइयां महंगी होने वाली है। जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल से दर्द निवारक, एंटीबायोटिक और एंटी-इन्फेक्टिव जैसी जरूरी दवाओं की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी होगी। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में सालाना बदलाव के आधार पर, सरकार ने 'राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची' (NLEM) के तहत आने वाली दवाओं की कीमतों में 0.6% की बढ़ोतरी की अनुमति दी है।

नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कहा, "वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग और आंतरिक व्यापार विभाग के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आंकड़ों के आधार पर, कैलेंडर वर्ष 2025 में WPI में सालाना बदलाव 2024 की इसी अवधि की तुलना में (+)0.64956% रहा है।"

संशोधित कीमतें NLEM में शामिल 1,000 से ज़्यादा दवाओं पर लागू होंगी। निर्धारित दवाओं की कीमतों में बदलाव की अनुमति साल में एक बार दी जाती है।

आवश्यक दवाओं की सूची में पैरासिटामोल, बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक जैसे एजिथ्रोमाइसिन, एनीमिया-रोधी दवाएं, विटामिन और खनिज शामिल हैं। मध्यम से गंभीर रूप से बीमार Covid-19 मरीज़ों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं और स्टेरॉयड भी इस सूची में शामिल हैं।

फार्मा उद्योग के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामूली बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब ईरान युद्ध के कारण इनपुट लागत में बेतहाशा वृद्धि से इस क्षेत्र के मुनाफे पर गंभीर दबाव पड़ा है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, चल रहे युद्ध के कारण कुछ प्रमुख 'एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स' (APIs) और सॉल्वैंट्स की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है, और यह मामूली बढ़ोतरी इस स्थिति में शायद ही कोई मदद कर पाएगी।

उदाहरण के लिए, पिछले कुछ हफ़्तों में APIs की कीमतों में औसतन 30-35% की बढ़ोतरी हुई है। ग्लिसरीन की कीमत में 64% की उछाल आई है, जबकि पैरासिटामोल की कीमत 25% बढ़ी है और सिप्रोफ्लोक्सासिन 30% महंगा हो गया है। उद्योग के अधिकारियों ने बताया कि पॉलीविनाइल क्लोराइड और एल्युमिनियम फॉयल जैसी पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में भी 40% की बढ़ोतरी हुई है।

फार्मा लॉबी समूह के एक प्रतिनिधि ने बताया कि ग्लिसरीन, प्रोपलीन ग्लाइकोल और सिरप, ओरल ड्रॉप्स तथा स्टेराइल दवाओं सहित हर तरह की तरल दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले सॉल्वैंट्स महंगे हो गए हैं। इंटरमीडिएट्स की कीमतों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। इसे देखते हुए, हमें कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी की ज़रूरत है, और हम NPPA के सामने अपना पक्ष रखेंगे।

टॅग्स :Medicines and HealthcareमहंगाईभारतIndia
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