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बच्चों को खिलायें ₹20 की ये खास चीज, कभी नहीं होगी कुपोषण, मोटापा, खून की कमी की समस्या

By उस्मान | Updated: November 18, 2019 16:22 IST

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि 40 प्रतिशत किशोरियां और 18 प्रतिशत किशोर एनीमिया से ग्रस्त हैं। साथ ही स्कूली बच्चों और किशोरों में मोटापे की समस्या बढ़ने से उनमें मधुमेह (10 प्रतिशत) जैसे गैर-संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है।

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यूनिसेफ ने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्यंजनों की एक किताब पेश की है जिसका नाम 'उत्तपम से लेकर अंकुरित दाल के पराठे' है। यह किताब बताती है कि 20 रुपये से कम कीमत में तैयार हो जाने वाले पौष्टिक भोजन से बच्चों में कम वजन, मोटापा और एनीमिया जैसी समस्याओं से निपटा जा सकता है। 

यह पुस्तक समग्र राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण 2016-18 के निष्कर्षों पर आधारित है, जिनके अनुसार पांच साल से कम उम्र के 35 फीसदी बच्चे कमजोर, 17 फीसदी बच्चे मोटापा से ग्रस्त और 33 फीसदी बच्चे सामान्य से कम वजन के हैं। 

40 फीसदी लड़कियों को एनीमियासर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि 40 प्रतिशत किशोरियां और 18 प्रतिशत किशोर एनीमिया से ग्रस्त हैं। साथ ही स्कूली बच्चों और किशोरों में मोटापे की समस्या बढ़ने से उनमें मधुमेह (10 प्रतिशत) जैसे गैर-संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है।

मोटापा कम करने और बढ़ाने की रेसिपी28 पन्नों की इस पुस्तक में ताजे तैयार किए गए व्यंजनों की विधियां और प्रत्येक को बनाने में लगी लागत को सूचीबद्ध किया गया है। इस पुस्तक में कम वजन की समस्या से निपटने के लिए आलू के भरवां पराठे, पनीर काठी रोल और साबूदाना कटलेट जैसे व्यंजनों की विधियां दी गई हैं। वहीं मोटापा दूर करने के लिए अंकुरित दाल के पराठे, पोहा और सब्जियों वाले उपमा के सुझाव दिए गए हैं। 

पोषक तत्वों की जानकारीइस पुस्तक में दिए गए सभी व्यंजनों की कैलोरी मात्रा के अलावा प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, फाइबर, आयरन, विटामिन सी और कैल्शियम की मात्रा की विस्तृत जानकारी दी गई है। यूनिसेफ की प्रमुख हेनरीटा एच फोर ने बताया कि इस पुस्तिका का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि कौन सा खाद्य पदार्थ कितना पौष्टिक है।

उन्होंने आगे कहा कि इस पुस्तिका को स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए और यदि क्षेत्रीय भाषाओं में इसका अनुवाद किया जाए तो इसे लोगों तक पहुंचाना आसान हो जाएगा। इस पुस्तक के साथ मिलने वाली पूरक पुस्तिका में बच्चों में कम वजन, मोटापा और एनीमिया के कारणों और परिणामों के बारे में बताया गया है।

हाल ही में सरकार ने स्वीकार किया है कि देश में मां बनने योग्य आयुवर्ग (15 से 49 साल) वाली 53 प्रतिशत महिलायें खून की कमी यानी एनीमिया की शिकार हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के आधार पर यह जानकारी दी है। 

चौबे ने बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार रक्ताल्पता की शिकार 15 से 49 साल के आयुवर्ग की महिलाओं में सर्वाधिक महिलायें अनुसूचित जनजाति (59.9 प्रतिशत) की है। इसके अलावा 55.9 प्रतिशत अनुसूचित जाति की महिलायें भी खून की कमी की शिकार हैं। 

उन्होंने बताया कि इस मामले में अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं की हिस्सेदारी 20.9 प्रतिशत होने के साथ, इनमें मुस्लिम महिलाओं का प्रतिशत 28.5 है।

इन बातों का रखें ध्यान

इस किताब से हटकर आपको बच्चों की डाइट में मांस, हरे पत्तेदार सब्जियां, किशमिश, चना, सोयाबीन, खजूर, बादाम आदि आयरन युक्त खाद्य पदार्थों को जरूर शामिल करना चाहिए।

विटामिन सी से युक्त पदार्थ हीमोग्लोबिन के उत्पादन में सहायक है। इसीलिए विटामिन सी से युक्त खाद्य पदार्थ जैसे संतरा, अमरूद, आंवला, नींबू आदि का सेवन खूब करें।

फोलिक एसिड से युक्त खाद्य पदार्थ जैसे दाल, हरे पत्तेदार सब्जियां, भिंडी और अंडे आदि का सेवन करें। क्योंकि यह एक बी कॉम्प्लेक्स विटामिन है, जो हीमोग्लोबिन के उत्पादन के लिए आवश्यक घटक है।

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