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बिहार में झोलाछाप डॉक्टरों की कोई वैधता नहीं, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने विधान परिषद में कहा-दवा लिखने, ऑपरेशन करने, सुई देने का अधिकार नहीं?

By एस पी सिन्हा | Updated: February 24, 2026 15:23 IST

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले झूठे वीडियो और सलाहों से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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ठळक मुद्देस्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने स्पष्ट किया कि बिहार में झोलाछाप डॉक्टरों की कोई वैधता नहीं है।केवल मरीज को यह सलाह देना है कि इलाज के लिए कहां जाना चाहिए और किस प्रकार का इलाज बेहतर होगा।किसी भी प्रकार की दवा देने, सुई लगाने या ऑपरेशन करने की अनुमति इन लोगों को नहीं है।

पटनाः बिहार विधान परिषद में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने स्पष्ट किया कि बिहार में झोलाछाप डॉक्टरों को लेकर सख्त कानून लागू है, लेकिन कई लोग इसके दायरे और अधिकार को लेकर भ्रमित हैं। दरअसल विधान परिषद में विधान पार्षद डॉक्टर राज्यवर्धन सिंह आजाद ने स्वास्थ्य मंत्री से इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक झोलाछाप डॉक्टर यूट्यूब देखकर मरीज का ऑपरेशन करता दिख रहा था। राज्यवर्धन सिंह ने पूछा कि क्या ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार कोई कार्रवाई करेगी? क्या झोलाछाप डॉक्टरों के लिए कोई नियम बनाए गए हैं? इस सवाल पर जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने स्पष्ट किया कि बिहार में झोलाछाप डॉक्टरों की कोई वैधता नहीं है।

बिहार में इस तरह का कोई व्यक्ति केवल चिकित्सा परामर्शी हो सकता है। उनके पास दवा लिखने, ऑपरेशन करने, सुई देने या किसी प्रकार का चिकित्सीय हस्तक्षेप करने का अधिकार बिल्कुल नहीं है। उनका काम केवल मरीज को यह सलाह देना है कि इलाज के लिए कहां जाना चाहिए और किस प्रकार का इलाज बेहतर होगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बिहार में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कानून काफी कड़ा है। कोई भी व्यक्ति बिना डॉक्टर की डिग्री लिए मेडिकल प्रैक्टिस नहीं कर सकता। यदि कोई ऐसा करता है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली जैसे अन्य राज्यों में भी झोलाछाप डॉक्टरों को लेकर सख्त नियम हैं और बिहार में भी स्थिति इसी तरह है।

मंगल पांडेय ने जोर देकर कहा कि झोलाछाप डॉक्टर केवल परामर्श देने तक सीमित हैं। वे मरीज को सलाह दे सकते हैं कि उचित इलाज कहां संभव है और उसे किस डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा किसी भी प्रकार की दवा देने, सुई लगाने या ऑपरेशन करने की अनुमति इन लोगों को नहीं है।

अगर कोई व्यक्ति इन अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उसे कानून के तहत दंडित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध चिकित्सा सेवा का उपयोग न करें और केवल प्रमाणित डॉक्टर या अस्पताल से ही इलाज कराएं। साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले झूठे वीडियो और सलाहों से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

टॅग्स :बिहारपटनाHealth and Family Welfare Department
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