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पूछ एआई का टर्न ओवर 50 लाख का और 25000 करोड़ रुपए का एमओयू किया?, जल्दी ही नाता तोड़ेगी योगी सरकार! 

By राजेंद्र कुमार | Updated: March 25, 2026 19:45 IST

टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट एक साथ आगे बढ़ेंगे. सीएम योगी के इस दावे को सोशल मीडिया पर लोगों ने निशाने पर लिया.

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ठळक मुद्देएमओयू को मुख्यमंत्री ने योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया.मीडिया पर यह दावा किया कि अब उत्तर प्रदेश को एआई प्रदेश बनाया जाएगा. कंपनी के दावे में गड़बडी पाए जाने पर करार (एमओयू) को रद्द  किया जाएगा.

लखनऊः उत्तर प्रदेश को डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हब बनाने के लिए प्रदेश सरकार के अफसरों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देश भर में किरकरी करा दी. सूबे में इन्वेस्ट यूपी के अफसरों ने राज्य में एआई पार्क स्थापित किए जाने को लेकर एक ऐसी कंपनी (पूछ एआई) के साथ 25 हजार करोड़ रुपए का एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) साइन कर लिया, जिसका टर्नओवर करीब 50 लाख रुपए ही था. पूछ एआई के बारे में बिना पड़ताल किए ही हुए इस एमओयू को मुख्यमंत्री ने योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया.

यही नहीं पूछ एआई के साथ हुए एमओयू का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर यह दावा किया कि अब उत्तर प्रदेश को एआई प्रदेश बनाया जाएगा. यूपी एक ऐसा हब होगा जहां टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट एक साथ आगे बढ़ेंगे. सीएम योगी के इस दावे को सोशल मीडिया पर लोगों ने निशाने पर लिया.

कहा गया पूछ एआई के दस्तावेजों की जांच किए बिना ही अफसरों ने इस कंपनी के साथ एमओयू कर मुख्यमंत्री की किरकिरी कराई है. दो साल पहले भी डाटा सेंटर की स्थापना के लिए व्यूनाउ कंपनी के साथ प्रदेश सरकार की किरकरी इसी प्रकार इन्वेस्ट यूपी के अफसरों ने कराई थी.

फिलहाल इस नए मामले में अब पूछ एआई कंपनी के दस्तावेजों की जांच की जा रही है.इन्वेस्ट यूपी के सीओ विजय किरण का कहना है कि उक्त कंपनी के दावे में गड़बडी पाए जाने पर करार (एमओयू) को रद्द  किया जाएगा.

व्यूनाउ कंपनी के झटके से नहीं लिया सबक

इन्वेस्ट यूपी के अफसरों से मिली जानकारी के अनुसार, पूछ एआई वॉट्सऐप पर चलने वाला एक चैटबॉट टूल है. भारत की भाषाओं पर काम करने वाला यह टूल वॉइस बेस्ड है. इसके जरिए आप वॉट्सऐप पर ही आई का इस्तेमाल कर सकते हैं और उससे कुछ भी पूछ सकते हैं. पूछ एआई कंपनी को सिद्धार्थ भाटिया और अर्जित जैन मिलकर चलाते हैं.

इसी साल 13 जनवरी को इन्वेस्ट यूपी के अफसरों की मदद से सिद्धार्थ भाटिया की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात हुई थी. इसके बाद सरकार ने इस कंपनी का एमओयू साइन किया और मुख्यमंत्री योगी ने सोशल मीडिया पर इस कंपनी के साथ हुए एमओयू का उल्लेख किया. तो लोगों ने यह सवाल किया कि जिस कंपनी का रेवेन्यू ही 50 लाख का है.

उससे प्रदेश सरकार 25 हजार करोड़ रुपए का एमओयू कैसे साइन कर सकती है. क्या सरकार यह भूल गई की दो साल पहले प्रदेश सरकार से डाटा सेंटर स्थापित करने के लिए पंजाब की व्यूनाउ कंपनी ने 13,500 करोड़ रुपए के निवेश का करार किया था. इस करार की आड़ में उक्त कंपनी के निवेशकों ने डाटा सेंटर की स्थापना के नाम पर लोगों से करोड़ों  रुपए एकत्र कर लिए थे.

इस फ़्राड की जानकारी होने पर ईडी ने उक्त कंपनी के संचालक सुखविंदर सिंह और उसकी पत्नी को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था. इस कंपनी से झटका खाने के बाद भी सरकार ने पूछ एआई कंपनी से एमओयू करने में नहीं दिखाई सतर्कता, जिसके चलते यह विवाद हो रहा है.

खामी मिली तो एमओयू होगा रद्द

सोशल मीडिया पर इस तरह से सवाल उठाते ही अखिलेश यादव ने इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होने कहा कि भाजपा सरकार के अधिकांश एमओयू केवल कागजों तक सीमित रहते हैं और जमीनी स्तर पर उनका असर नहीं दिखता. इस मामले पर विपक्षी नेताओं के कूदने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पूछ एआई के साथ हुआ एमओयू केवल प्रारंभिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जो केवल जांच-पड़ताल और परियोजना मूल्याकन से पहले किया जाता है.

पूछ एआई के साथ हुआ एमओयू भी राज्य में एआई क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशने की एक शुरुआती पहल है. एमओयू राज्य सरकार पर किसी भी प्रकार से बाध्यकारी नहीं होते हैं. जो भी संभावित निवेशक निर्धारित मानकों और शर्तों को पूरा नहीं कर पाएंगे उनके साथ किया गया एमओयू स्वतः: समाप्त माना जाएगा.

सीएम योगी के इस कथन के बाद इन्वेस्ट यूपी के सीओ विजय किरण आनंद का कहना है कि एमओयू होने के बाद दस्तावेजों की जांच की जाती है. पूछ एआई कंपनी से दस्तावेज मांगे गए हैं. एमओयू को लेकर अभी कोई दिशा निर्देश नहीं दिया गया है, लेकिन अगर पूछ एआई कंपनी के दस्तावेजों कोई खामी होगी तो एमओयू रद्द किया जाएगा.  

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