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अमेरिका के नागरिक भारत में एआई के लिए भुगतान क्यों कर रहे हैं?, नवारो ने कहा-हमारा खून चूसने वाले वैंपायर...

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 18, 2026 20:35 IST

अमेरिकी बिजली का उपयोग कर रहा है और चैट जीपीटी के बड़े उपयोगकर्ताओं को सेवाएं प्रदान कर रहा है, उदाहरण के लिए भारत, चीन और दुनिया के अन्य हिस्सों में।

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ठळक मुद्देटैरिफ में रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है।इसलिए यह एक और मुद्दा है, जिसे सुलझाया जाना चाहिए।हमारा खून चूसने वाले वैंपायर (पिशाचों) की तरह होते हैं।’’

न्यूयॉर्क/वाशिंगटनः व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि अमेरिका के नागरिक भारत में कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए भुगतान क्यों कर रहे हैं? नवारो की ये टिप्पणियां भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव के बीच शनिवार को आईं। नयी दिल्ली-वाशिंगटन के संबंधों में खटास की शुरुआत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगाने के बाद हुई। इस टैरिफ में रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है।

नवारो ने ‘रियल अमेरिकाज वॉयस’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, “सवाल यह उठता है कि अमेरिका के नागरिक भारत में एआई के लिए भुगतान क्यों कर रहे हैं? चैट जीपीटी अमेरिकी जमीन पर काम कर रहा है, अमेरिकी बिजली का उपयोग कर रहा है और चैट जीपीटी के बड़े उपयोगकर्ताओं को सेवाएं प्रदान कर रहा है, उदाहरण के लिए भारत, चीन और दुनिया के अन्य हिस्सों में।

इसलिए यह एक और मुद्दा है, जिसे सुलझाया जाना चाहिए।” उन्होंने पिछले साल रूस से तेल खरीदने, अधिक शुल्क लगाने के लिए भारत की लगातार आलोचना की थी और भारत को ‘टैरिफ का महाराजा’ करार दिया था। नवारो ने भारत के रूस से तेल खरीदने को ‘ब्लड मनी’ भी कहा था और बताया था कि यूक्रेन युद्ध से पहले दिल्ली ने मॉस्को से बड़ी मात्रा में तेल नहीं खरीदा था।

वहीं, भारत का कहना है कि किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह, वह अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। नेवारो ने ‘ब्रिक्स’ देशों पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘‘असल बात यह है कि इस समूह के किसी भी देश का अस्तित्व अमेरिका को उत्पाद बेचे बिना नहीं रह सकता। और जब वे अमेरिका को अपने उत्पाद बेचते हैं, तो अपने निर्यात के माध्यम से, वे अनुचित व्यापार तौर तरीकों से हमारा खून चूसने वाले वैंपायर (पिशाचों) की तरह होते हैं।’’ 

टॅग्स :अमेरिकानरेंद्र मोदीडोनाल्ड ट्रंप
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