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ईरान में फंसे हैं 150 से 200 छात्र, माता-पिता ने चिंता जताई, निकासी प्रक्रिया में तेजी लाने की अपील

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: March 26, 2026 16:09 IST

आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है-इसमें 10,000 रुपये की वीजा फीस का नुकसान भी शामिल है।

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ठळक मुद्देरोजाना केवल 6 से 10 छात्रों को ही एग्जिट क्लीयरेंस मिल पा रहा है।देरी ने कई छात्रों को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। अजरबैजान-ईरान सीमा से आर्मेनिया-ईरान सीमा की ओर जा रहे हैं।

जम्मूः कश्मीर के उन परिवारों में चिंता लगातार बढ़ रही है जिनके बड़ी संख्या बच्चे अभी भी ईरान में फंसे हुए हैं। इसकी वजह है-एग्जिट कोड जारी होने में देरी, बढ़ती आर्थिक परेशानियां और उनकी वापसी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निकासी प्रक्रिया बहुत धीमी गति से चल रही है; रोजाना केवल 6 से 10 छात्रों को ही एग्जिट क्लीयरेंस मिल पा रहा है।

इस देरी ने कई छात्रों को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया है। कई छात्र अपनी तय उड़ानें पहले ही चूक चुके हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है-इसमें 10,000 रुपये की वीजा फीस का नुकसान भी शामिल है। हालात और भी ज्यादा चिंताजनक हो गए हैं, क्योंकि परेशान छात्र अब दूसरे रास्तों की तलाश कर रहे हैं। वे अजरबैजान-ईरान सीमा से आर्मेनिया-ईरान सीमा की ओर जा रहे हैं।

इस उम्मीद में कि उन्हें वहां से निकलने की मंज़ूरी जल्दी मिल जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 52 छात्रों ने गंभीर आर्थिक तंगी के कारण तुरंत वहां से निकलने में अपनी असमर्थता जताई है। उनमें से कई छात्रों के हवाई टिकट रद्द हो गए, क्योंकि उन्हें समय पर एग्जिट कोड नहीं मिल पाए। भारी नुकसान हुआ और अब उनके पास दोबारा यात्रा का इंतजाम करने का कोई तत्काल साधन नहीं बचा है।

इन छात्रों के परिवारों का कहना था कि ये छात्र गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय दूतावास से अनुरोध किया है कि उन्हें उन आवासों में ही रहने दिया जाए, जो उन्हें पहले उपलब्ध कराए गए थे। हालांकि, दूतावास ने उन्हें सूचित किया है कि अब उन कमरों की जरूरत अन्य भारतीय नागरिकों के लिए है, जो वहां से निकाले जाने का इंतजार कर रहे हैं।

छात्रों से कमरे खाली करने को कहा गया है, जिससे उनकी मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं। रोजाना निकासी के बावजूद, अनुमान है कि ईरान के अलग-अलग हिस्सों में अभी भी लगभग 150 से 200 छात्र फंसे हुए हैं। चिंता की बात यह भी है कि गोलेस्तान यूनिवर्सिटी आफ मेडिकल साइंसेज के कुछ छात्रों ने अपने पासपोर्ट में वीजा की स्थिति से जुड़ी कुछ विसंगतियों की शिकायत की है।

जिससे उनके वहां से निकलने में और भी देरी हो सकती है। जम्मू कश्मीर में छात्रों के माता-पिता ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और अधिकारियों से निकासी प्रक्रिया में तेजी लाने की अपील की है। एक चिंतित अभिभावक ने कहा कि हर गुजरते दिन के साथ हमारी चिंता बढ़ती जा रही है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी छात्रों को सुरक्षित और जल्द से जल्द वापस लाया जाए।

हालांकि अधिकारियों ने संकेत दिया है कि सभी फंसे हुए छात्रों के 31 मार्च तक वापस लौटने की उम्मीद है, बशर्ते उन्हें समय पर एग्जिट कोड मिल जाएं। हालांकि, मौजूदा रफ्तार को देखते हुए, परिवार अभी भी चिंतित हैं। इस बीच, डा मोमिन खान द्वारा प्रतिनिधित्व किए जा रहे आल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने इस मामले में लगातार समर्थन और हस्तक्षेप के लिए विदेश मंत्रालय, आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी और कश्मीर के डिविज़नल कमिश्नर के कार्यालय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

टॅग्स :ईरानअमेरिकाइजराइलजम्मू कश्मीर
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