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इंदौर के इंजीनियर निक्की सुरेका की बेटी को बाजार के दूध से अपच की समस्या?, देशी नस्ल गिर-पूंगनूर की गौशाला बनाकर...

By बृजेश परमार | Updated: February 10, 2026 20:58 IST

आंध्र प्रदेश की इस स्वदेशी गौ नस्ल की विशेषताओं से प्रभावित होकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुंगूनूर को चारा खिलाते व प्यार करने वाली तस्वीर खूब वायरल हुई।

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ठळक मुद्देलोग इस गाय को अपने घर मे रखने लगे व कार मे घुमाते दिखने लगे हैं। गौमाता को लोग कार मे बैठाकर सम्मान देने से नहीं चूक रहे हैं। घर में भी इन गायों का आना-जाना और रहना आम है।

उज्जैनः अमेरिका में साफ्टवेयर कंसलटेंसी दे रहे इंदौर के इंजीनियर निक्की सुरेका की बेटी को बाजार के दूध से अपच की समस्या हुई और पंच गव्य चिकित्सकों ने उन्हें देशी गाय का दूध उपयोग की सलाह दी तो उन्होंने गिर के साथ पूनूंर नस्ल की गायों की गौशाला ही बना डाली। अब उनकी इस गौशाला का लाभ इंदौर के कई लोग ले रहे हैं। इस गौशाला में कुल 125 देशी गौवंश हैं। इनमें एक नंदी सहित 6 पूनूर नस्ल का गौवंश है। आंध्र प्रदेश की इस स्वदेशी गौ नस्ल की विशेषताओं से प्रभावित होकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पुंगूनूर को चारा खिलाते व प्यार करने वाली तस्वीर खूब वायरल हुई।

काफी लोग इस गाय को अपने घर मे रखने लगे व कार मे घुमाते दिखने लगे हैं। स्वदेशी गाय के प्रति बढते प्रेम से एक संकेत तो मिल ही रहे हैं कि गौमाता को लोग कार मे बैठाकर सम्मान देने से नहीं चूक रहे हैं। इंदौर निवासी साफ्टवेयर कंसलटेंट निक्की सुरेका भी अपनी कारों में इन गायों को घुमाते देखे जा सकते हैं और उनके घर में भी इन गायों का आना-जाना और रहना आम है।

पूंगनूर की भी तीन किस्म-

गौ की जो देशी नस्ल कुछ वर्षों पहले तक विलुप्त होने की कगार पर थीं उनके  संरक्षण  ने सुखद परिणाम दिए और ये गाय अपनी छोटी कदकाठी के द्वारा बहुत लोकप्रिय हुई। आंध्रप्रदेश के चित्तूर की देशी नस्ल पुंगूनूर नस्ल प्रदेश की औघोगिक राजधानी इंदौर में भी खूब पूछ परख में हैं। इंदौर के देव गुराडिया के पास सनावदिया गांव में ये गौशाला में खूब मजे में रह रही हैं।

ये गौशाला ट्रेंचिंग ग्राउंड से मात्र 4 किलोमीटर दूर हैं। श्री सुरेका बताते हैं कि पुंगूनूर गाय पूर्ण वयस्क होने पर भी मात्र  ढाई से चार फुट ऊंची ही रहती हैं। इनमें भी तीन नस्ल होती है। इनमें एक नस्ल मात्र पौने तीन –तीन फीट की ही रहती है। दुसरी नस्ल 27-28 इंच की होती है। तीसरी नस्ल 23-24 इंच की होती है। । गाय के बच्चे का औसत वजन  30 से 35 किलोग्राम ही रहता है।

व्यस्क गायों का वजन 50-60 किलो से 140 किलो तक होता है। कम वजन व कम ऊंचाई के कारण पुंगूनूर गाय की मांग पूरे देश मे बनी हुई है। 1997 मे जहां इनकी संख्या मात्र 230 थी वह वर्ष 2023 की गणना मे लगभग 13 हजार हो गई। इसके मूल में आंध्रप्रदेश सरकार और स्थानीय किसानों के प्रयास रहे हैं। गाय के संरक्षण पर राज्य शासन ने विशेष ध्यान दिया और परिणाम उत्साहजनक रहे।

गिर के साथ 5 पूंगनूर एवं एक नंदी

वैसे तो इस गौशाला की शुरुआत वर्ष 2016 से ही की जा चुकी है और गिर नस्ल का गौवंश यहां है। तीन माह पूर्व सुरेका ने यहां गौशाला को विकसित किया और अब यहां गिर नस्ल की गायों के साथ पुंगनूर नस्ल का 6 गौ वंश रह रहा है। इनमें एक नंदी हैं। ये गाय प्रतिदिन दोनों समय 1-डेढ लीटर दूध देती हैं।

एक कारण यह भी रहा कि इंदौर स्मार्ट सिटी होने से गौवंश बहुत दूर चला गया। शहर में गौवंश देखने में नहीं आता है ऐसे में गायों को रखना भी परेशानी बन रहा है इसके चलते पूंगनूर गायों के प्रति उनका रूझान तेजी से बढा और वे इन्हें इंदौर शहर में अपने निवास तक भी कार से ले जाते हैं।

दूध में स्वर्ण तत्व का अंश अधिक

पुंगूनूर गाय की प्रकृति बेहद सीधी और दोस्ती वाली  है इस कारण ये जल्दी ही अपने मालिक व घर के बच्चों से घुलमिल जाती हैं।इसी  विशेषता के कारण पुंगूनूर गाय को लोग अपने घर के अंदर पाल रहे हैं और कार की सीट पर बैठाकर घूमा रहे हैं।

आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार पूंगनूर गायों के दूध की विशेषताओं के कारण इनकी अपनी विशिष्ट पहचान है। गौ विशेषज्ञों और पशु वैज्ञानिकों के अनुसार इन गायों के दूध मे फेट ( वसा) की मात्रा अच्छी पाई गयी है। पुंगूनूर के दूध मे स्वर्ण के अंश भी होते हैं जो स्वास्थ्यवर्धक होते हैं।

गिर गायों का दूध पी रहा पूंगनूर का बछड़ा

सुरेका बताते हैं कि वे कुछ समय पूर्व ही इन्हें आंध्रप्रदेश से क्रय करके लाए हैं और बहुत कम समय में ही इन गायों ने सभी का दिल जीत लिया। पुंगूनूर गाय बहुत प्रेमी स्वभाव की होती हैं और अपने पालक को बहुत प्यार करती हैं। इनकी कीमत 2 लाख से लेकर 18लाख तक होती है। उन्होंने बताया कि गौशाला में पूंगनूर गाय का सबसे प्यारा बच्चा छोटा नंदी है।

ये गौवंश में हिल मिल गया है और  गीर गाय का दूध रोज पी रहा है। गीर गाय के थन को चूसता पुंगूनूर बछडा देख सभी आनंदित होते हैं। पूंगनूर गायों के दोस्ताना व्यवहार के कारण  शहर के कई परिवारों एवं ग्रामीण क्षेत्र के बहुत से बच्चे व युवा इनके साथ खेलने फार्म पर आ रहे हैं। खास बात यह है कि इस फार्म हाउस गौशाला को निजी आधार पर ही चलाया जा रहा है।

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