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कॉर्पोरेट संशोधन विधेयक पेश, संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा?,जानिए बदलाव, आखिर क्यों विरोध कर रहा विपक्ष?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 23, 2026 13:59 IST

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नियम 72 (1) के तहत विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि संवैधानिक सिद्धातों के अनुरूप नहीं है और इसमें बहुत सारी खामियां हैं।

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ठळक मुद्देतृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि इस विधेयक से सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) कमजोर होगा। सरकार कॉर्पोरेट अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना चाहती है या फिर नियमों को सख्त बनाना चाहती है।द्रमुक की सदस्य टी सुमति ने भी विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया।

नई दिल्लीः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में कॉर्पोरेट विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसका मकसद सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन करना है। यह विधेयक पेश किए जाने के बाद सदन ने वित्त मंत्री की अनुशंसा पर इसे संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने का फैसला किया। बीते 10 मार्च को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उक्त विधेयक को मंजूरी दी थी। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नियम 72 (1) के तहत विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि संवैधानिक सिद्धातों के अनुरूप नहीं है और इसमें बहुत सारी खामियां हैं।

तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि इस विधेयक से सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि सरकार कॉर्पोरेट अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना चाहती है या फिर नियमों को सख्त बनाना चाहती है। द्रमुक की सदस्य टी सुमति ने भी विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्षी सांसदों की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि यह विधेयक दो साल के विचार-विमर्श के बाद यहां लाया गया है तथा कॉर्पोरेट विधि समिति में सभी पक्षों को सुना गया है।उन्होंने कहा कि सीएसआर के तहत तीन-चार श्रेणियां हैं और सिर्फ शुद्ध मुनाफे की श्रेणी में बदलाव किया जा रहा है।

इसके बाद वित्त मंत्री ने विधेयक पेश किया और इसे संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने की अनुशंसा की, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। यह विधेयक छोटे उद्योगों, स्टार्टअप और किसानों की उत्पादक कंपनियों के लिए अनुपालन को आसान बनाने, कुछ आपराधिक अपराधों को जुर्माने में बदलने और कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने का प्रस्ताव करता है।

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