लाइव न्यूज़ :

वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग : विदेश नीति में दो नई सराहनीय पहल

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: October 22, 2021 11:02 IST

भारत ने अमेरिका के साथ मिलकर पश्चिम एशिया में जो चौगुटा बनाया है, वह अफगान-संकट के हल में तो मददगार होगा ही, इस्लामिक जगत से भी भारत के संबंध मजबूत बनाएगा लेकिन भारत को दो बातों का ध्यान जरूर रखना होगा। एक तो वह अमेरिका का पिछलग्गू होने से बचता रहे और दूसरा, इस नए चौगुटे को ईरान के खिलाफ मोर्चाबंदी न करने दे।

Open in App

ढाई महीने से गिरती-लुढ़कती हमारी विदेश नीति अपने पांवों पर खड़े होने की कोशिश कर रही है, यह बात मेरे लिए विशेष खुशी की है। मैं बराबर पहले दिन से ही लिख रहा था कि भारत सरकार को तालिबान से सीधे बात करनी चाहिए लेकिन नौकरशाहों के लिए कोई भी पहल करना इतना आसान नहीं होता, जितना कि किसी साहसी और अनुभवी नेता के लिए होता है। जो भी हो, इस समय दो सकारात्मक घटनाएं हुई हैं। पहली, मास्को में तालिबान के साथ हमारी सीधी बातचीत और दूसरी, अमेरिका, इजराइल, यूएई तथा भारत के नए चौगुटे की शुरुआत!

जहां तक मास्को-बैठक का सवाल है, उसमें रूसी विदेश मंत्नी सर्गेइ लावरोव ने साफ-साफ कहा है कि तालिबान की सरकार और नीतियां सर्वसमावेशी होनी चाहिए। उनमें सारे कबीलों और लोगों को ही प्रतिनिधित्व नहीं मिलना चाहिए, बल्कि विभिन्न राजनीतिक शक्तियों का भी उसमें समावेश होना चाहिए यानी हामिद करजई और अब्दुल्ला-जैसे नेताओं को भी शासन में भागीदारी मिलनी चाहिए अर्थात तालिबान सरकार में कुछ अनुभवी और जनता में लोकप्रिय तत्व भी होने चाहिए।

इसके अलावा लावरोव ने इस बात पर भी जोर दिया कि अब अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों में आतंकवाद का निर्यात कतई नहीं होना चाहिए। इस बैठक में चीन, पाकिस्तान और ईरान समेत 10 देश शामिल हुए थे। रूस ने वही बात इस बैठक में कही, जो भारत कहता रहा है। भारत के प्रतिनिधि जे.पी.सिंह, जिन्हें काबुल में कूटनीति का लंबा अनुभव है, मास्को आए, तालिबान नेताओं से खुलकर बात भी की और अफगान जनता की मदद के लिए पहले की तरह 50 हजार टन अनाज और दवाइयां भेजने की भी घोषणा की।

यदि अगले कुछ हफ्तों में तालिबान सरकार का बर्ताव ठीक-ठाक दिखा तो कोई आश्चर्य नहीं कि उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलनी शुरू हो जाए, लेकिन गृह मंत्नी सिराजुद्दीन हक्कानी ने तालिबानी खीर में कुछ नीम की पत्तियां डाल दी हैं। उन्होंने ऐसे ‘शहीदों’ का सम्मान किया है और उनके परिजनों को कुछ धनराशि भेंट की है, जिन्होंने पिछली सरकार के फौजियों और नेताओं पर जानलेवा हमले किए थे। ऐसी उत्तेजक कार्रवाई से उन्हें फिलहाल बचना चाहिए था। 

यदि भारत सरकार अपना दूतावास काबुल में फिर से खोल दे तो हमारे राजनयिक तालिबान को उचित सलाह दे सकते हैं। भारत ने अमेरिका के साथ मिलकर पश्चिम एशिया में जो चौगुटा बनाया है, वह अफगान-संकट के हल में तो मददगार होगा ही, इस्लामिक जगत से भी भारत के संबंध मजबूत बनाएगा लेकिन भारत को दो बातों का ध्यान जरूर रखना होगा। एक तो वह अमेरिका का पिछलग्गू होने से बचता रहे और दूसरा, इस नए चौगुटे को ईरान के खिलाफ मोर्चाबंदी न करने दे।

टॅग्स :India Afghanistanतालिबानअफगानिस्तानभारतIndia
Open in App

संबंधित खबरें

क्रिकेटउप-कप्तानी से हटाए जाएंगे पंत?, अफगानिस्तान के खिलाफ क्या खेलेंगे रोहित और हार्दिक?, गुवाहाटी में टीम की घोषणा

क्रिकेटउप-कप्तानी से हटाए जाएंगे पंत?, अफगानिस्तान के खिलाफ क्या खेलेंगे रोहित और हार्दिक?, गुवाहाटी में टीम की घोषणा

भारत'भारतवासियों का विश्वास मुझे न रुकने देता है, न थकने' नीदरलैंड्स में बोले PM मोदी

भारतयह समय राजनीति का नहीं, देश संभालने का है

भारतबढ़ती महंगाई, घटती विकास दर की चुनौती

विश्व अधिक खबरें

विश्वप्रेस फ्रीडम पर पीएम मोदी के ‘सवाल टालने’ पर नॉर्वेजियन पत्रकारों के साथ MEA की तीखी बहस, विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) कहा- "बताता हूँ भारत क्या है" | WATCH

विश्वकतर, सऊदी अरब और यूएई के अनुरोध पर ईरान पर हमला नहीं किया, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा-युद्ध में मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान पर कोई बात नहीं

विश्वयुद्ध के बादल छंटे? डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले को रोका, तेहरान के साथ 'बड़ी बातचीत' का किया दावा

विश्वडार्विन, लिंकन, मार्क्स और समानता का साझा सिद्धांत

विश्वनीदरलैंड पीएम रॉब जेटन दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले देश भारत को क्यों ज्ञान दे रहे हैं?