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सऊदी ‘हग डिप्लोमेसी’ कितनी असरदार?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 24, 2019 00:33 IST

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पाकिस्तान के अपने बहुचर्चित दौरे के बाद भारत यात्ना संपन्न कर चीन के अपने अगले पड़ाव पर चले गए

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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पाकिस्तान के अपने बहुचर्चित दौरे के बाद भारत यात्ना संपन्न कर चीन के अपने अगले पड़ाव पर चले गए. पश्चिम एशिया की राजनीति के एक प्रमुख बिंदु रहे सऊदी अरब के शहजादे की भारत की पहली राजकीय यात्ना में प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल के नियमों को दरकिनार कर हवाई अड्डे पर जा कर अगवानी की, उन्हें गर्म जोशी से गले लगाया. सवाल है कि क्या यह ‘हग डिप्लोमेसी’ आतंक से निपटने, विशेष तौर पर सीमा पार के आतंक से निपटने में भारत की सहयोगी बन सकेगी? क्या इससे दोनों देशों के बीच आपसी समझ बूझ बढ़ेगी, द्विपक्षीय रिश्तों का एक नया दौर शुरू होगा या फिर भारत और पाकिस्तान  के साथ अपने रिश्ते निभाने में वह संतुलन भर साधता रहेगा?

सुर्खियों में रहे इस दौरे को जहां एक तरफ ‘काफी महत्वपूर्ण और  सफल’ बताया गया वहीं इस यात्ना के प्रारंभ में शहजादे द्वारा जारी बयान में पुलवामा हमले  का जिक्र  नहीं होने और पाकिस्तान और  पुलवामा हमले की जिम्मेवारी लेने वाले पाक स्थित आतंकी गुट जैश-ए-मोहम्मद का उल्लेख नहीं किए जाने पर सवाल खड़े किए गए. लेकिन राहत की बात यह रही कि बाद में दोनों देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान में पुलवामा हमले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की गई  और सऊदी अरब ने भारत के इस रुख से सहमति जाहिर की कि  संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी संगठनों और आतंकियों को  प्रतिबंधित किए जाने की जरूरत है.

अलबत्ता इस में फिर जैश और उस के आतंकी सरगना मसूद अजहर के नाम का जिक्र  नहीं था. जब हम इस यात्ना का आकलन करते हैं तो यहां यह भी गौर करना अहम होगा कि भारत और सऊदी अरब द्वारा जारी संयुक्त बयान में आतंक को किसी देश द्वारा प्रायोजित किए जाने की भर्त्सना की गई है. यह आतंक के प्रति भारत के रुख पर सऊदी अरब की सहमति है जो निश्चय ही सकारात्मक है. 

पाक दौरे में सऊदी अरब द्वारा उसे  दी गई 20 अरब डॉलर की मदद पर पश्चिम एशिया मामलों के एक विशेषज्ञ का कहना है कि पाकिस्तान को यह मदद उसकी खस्ता हालत से उबारने में मदद के तौर पर है. इसकी तुलना भारत में सऊदी अरब द्वारा 100 अरब डॉलर  के निवेश की वचन बद्धता से कतई नहीं की जा सकती है क्योंकि सऊदी अरब ने यह समझौता भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति के मद्देनजर किया है. बहरहाल इस दौरान भारत और सऊदी अरब के बीच विभिन्न क्षेत्नों में उभयपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए पांच समझौते भी हुए. प्रधानमंत्नी मोदी और सऊदी अरब के युवराज सलमान के बीच विस्तृत बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच पर्यटन समेत कई क्षेत्नों में द्विपक्षीय निवेश के लिए पांच सहमति ज्ञापन पत्नों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए. लगभग 27 लाख  भारतीय सऊदी अरब में काम करते हैं. देखना होगा कि सऊदी  शहजादे की इस यात्ना से भारत सऊदी रिश्ते क्या स्वरूप लेते हैं.

टॅग्स :सऊदी अरबनरेंद्र मोदी
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