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ब्लॉगः अफगानिस्तान में अमेरिका का करीब 20 वर्ष का सैन्य अभियान खत्म, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का दावा क्रूर मजाक

By अवधेश कुमार | Updated: September 2, 2021 16:36 IST

अमेरिकी सेंट्रल कमान के जनरल फ्रैंक मैकेंजी ने  वाशिंगटन में अभियान संपन्न होने की घोषणा करते हुए कहा कि काबुल हवाईअड्डे से देर रात तीन बजकर 29 मिनट (ईस्टर्न टाइम जोन) पर आखिरी विमानों ने उड़ान भरी.

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ठळक मुद्देअमेरिका के अंतिम विमान के उड़ान भरने के साथ ही तालिबान ने अफगानिस्तान के पूरी तरह स्वतंत्न होने की घोषणा कर दी.तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि सभी अमेरिकी सैनिक काबुल हवाईअड्डे से रवाना हो गए हैं.आखिरी पांच विमान रवाना हो गए हैं और अब यह अभियान समाप्त हो गया है.

क्रिस डोनाह्यू अमेरिका के सबसे आखिरी जनरल थे जिन्होंने 30-31 अगस्त की रात करीब 3.30 बजे अफगानिस्तान की धरती से अमेरिका जाने वाले विमान पर कदम रखा.

अंधेरी रात में उनके शरीर पर प्रकाशमान सैनिक वर्दी वाली तस्वीरें पूरी दुनिया में वायरल हुईं. इसके साथ अफगानिस्तान में अमेरिका का 19 साल, 10 महीने और 25 दिन यानी करीब 20 वर्ष का सैन्य अभियान खत्म हुआ. अमेरिकी सेंट्रल कमान के जनरल फ्रैंक मैकेंजी ने  वाशिंगटन में अभियान संपन्न होने की घोषणा करते हुए कहा कि काबुल हवाईअड्डे से देर रात तीन बजकर 29 मिनट (ईस्टर्न टाइम जोन) पर आखिरी विमानों ने उड़ान भरी. अमेरिका के अंतिम विमान के उड़ान भरने के साथ ही तालिबान ने अफगानिस्तान के पूरी तरह स्वतंत्न होने की घोषणा कर दी.

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि सभी अमेरिकी सैनिक काबुल हवाईअड्डे से रवाना हो गए हैं और अब हमारा देश पूरी तरह स्वतंत्न है. काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर तैनात तालिबान के एक लड़ाके हेमाद शेरजाद ने कहा, ‘आखिरी पांच विमान रवाना हो गए हैं और अब यह अभियान समाप्त हो गया है. अपनी खुशी बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है.. हमारे 20 साल का बलिदान काम आया.’ तालिबान के लड़ाकों ने अमेरिकी विमानों को देर रात रवाना होते देखा, हवा में गोलियां चलानी शुरू कीं और गोलियों की आतिशबाजी से जीत का जश्न मनाया.

उसके बाद से तालिबान की प्रतिक्रियाएं और जश्न मनाने के दृश्य बता रहे हैं कि उन्होंने अमेरिकी वापसी को किस दृष्टिकोण से लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने वापसी के बाद राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा है कि हमारा अफगान मिशन सफल रहा तथा वापसी का फैसला बिल्कुल सही है. हालांकि विश्व समुदाय को छोड़िए, स्वयं अमेरिका में ही इस समय उनकी बातों से सहमत होने वालों की संख्या अत्यंत कम है. यह प्रश्न तो उठता ही है कि आखिर अमेरिका ने अफगान मिशन में पाया क्या? उसके 2461 सैनिक मारे गए, अप्रैल तक 3846 अमेरिकी सैन्य ठेकेदारों की मौत का भी आंकड़ा है.

उसके नेतृत्व में नाटो और अन्य देशों के 1144 जवान तथा संबंद्ध सेवा सदस्य भी मारे गए हैं. अमेरिका ने बेतहाशा खर्च भी किया. इसके अलग-अलग आंकड़े हैं. लेकिन इसके समानांतर यह मत भूलिए कि इन 20 सालों में करीब 47,245 अफगान नागरिक मारे गए हैं. इसके अलावा चार लाख के आसपास अफगानों को दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ी, 50 लाख के आसपास पलायन को मजबूर हुए और घायल होने वालों की संख्या 10 लाख से ज्यादा होगी. जो बाइडेन  अगर अपने मिशन को सफल मानते हैं तो यह प्रश्न भी उठाया जाएगा कि आखिर इतने बलिदान के बावजूद अफगानियों को क्या मिला?

आज की हालत विस्तार से बताने की आवश्यकता नहीं. इन 20 सालों में जिन अफगानों ने अलग-अलग तरीके से तालिबान के विरुद्ध अमेरिका का सहयोग किया, मदद की वे सब तालिबान के निशाने पर हैं. हमने एक दुभाषिए को अमेरिका द्वारा छोड़े गए सी हॉक हेलिकॉप्टर से लटका कर आकाश में फांसी देने का दृश्य देखा है.

दुभाषिए, जो अमेरिका के लिए अफगान भाषा का अंग्रेजी में अनुवाद करते थे, जासूसी करते थे, सैनिकों को रास्ता दिखाते थे, वे इनके आंख और कान थे. बाइडेन ने वादा किया था कि हम आपको तालिबान के हवाले नहीं छोड़ेंगे लेकिन जितनी संख्या इनकी थी, उनमें से आधे को भी अमेरिका ने वीजा नहीं दिया. उनको तालिबान के हवाले छोड़ कर निकल गए.

अमेरिका ने बायोमीट्रिक डाटा और पूरा उपकरण आदि वहीं छोड़ दिया जिनके आधार पर तालिबान उन सारे लोगों को ढूंढ़ रहे हैं जिन्होंने अमेरिका की सहायता की. इसमें हर तरह के पेशे वाले, नौकरी करने वाले लोग शामिल हैं. तालिबान हालांकि अभी बायोमीट्रिक्स उपकरणों का सही इस्तेमाल नहीं जानते लेकिन पाकिस्तानी अधिकारी उनकी इसमें मदद कर रहे हैं.

महिलाओं और बच्चों को अमेरिका ने किस हाल पर छोड़ा? मानवाधिकारों के झंडाबरदार होने का अमेरिका का दावा कहां गया? 20 वर्ष पहले तालिबान की सत्ता खत्म करने वाला अमेरिका आज उनको विश्व में आंशिक रूप से मान्यता दिलाकर और इतनी मात्ना में सैन्य उपकरणों को छोड़ कर गया है जितनी दुनिया के 80-85 प्रतिशत देशों के पास नहीं है.

लेकिन जो बाइडन के आंख मूंदने के बाद उनकी विवशता भी समझ आती है. दुनिया भर से आतंकवादी तालिबान का साथ देने के लिए अफगानिस्तान आते गए और इन्हें रोकने वाला कोई नहीं रहा. सच कहा जाए तो अमेरिका ने अफगानिस्तान, विश्व समुदाय और खुद को भी ऐसा जोखिम भरा धोखा दिया है जिसके भयावह दुष्परिणाम आने वाले समय में सबको भुगतने पड़ सकते हैं.

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