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राहुल गांधी की बुराइयों पर बहुत हंस लिए, अब उनकी अच्छाइयां भी जान लीजिए

By राहुल मिश्रा | Updated: June 19, 2018 09:00 IST

एक राजनीतिक शख्सियत से अलग राहुल गांधी की बुराइयों से परे उनकी अच्छाइयों को बहुत कम लोग ही जानते हैं।

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का आज जन्मदिवस है। वो आज 48 वर्ष के हो गए हैं। राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को दिल्ली में हुआ। वे देश के मशहूर गांधी-नेहरू परिवार से हैं। राहुल गांधी वर्तमान समय में देश की राजनीति की ऐसी शख्यियत हैं जिनके बयानों और बातों पर लोग गंभीरता कम ही दिखाते हैं। कई मायनों में देखा जाए इसमें विपक्षी पार्टियों के ट्रोलर्स की भूमिका अधिक होती है। उन पर जोक्स बनाए जाते हैं और कई बार उनके भाषणों और बयानों को तोड़ मरोड़ कर भी पेश किया जाता है लेकिन एक राजनीतिक शख्सियत से अलग राहुल गांधी की बुराइयों से परे उनकी अच्छाइयों को बहुत कम लोग ही जानते हैं।  

आइए जानते हैं राहुल गांधी से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जो उनकी अच्छाइयां भी दर्शाती हैं-

आत्मविश्वास से लबरेज़-राहुल गांधी की बात की जाए तो राजनीति में इतनी हार मिलने के बावजूद हर चुनाव में, बिना अपना आत्मविश्वास खोए और जीत मिलने की उम्मीद खोए, खड़े होने की हिम्मत रखना राहुल गांधी की सबसे बड़ी खूबियों में से एक है। राहुल को उपचुनाव का राजा कहा जाता है क्योंकि कांग्रेस की कमान संभालने के बाद कांग्रेस पार्टी ने उनके नेतृत्व में कई उपचुनाव जीते हैं। हालांकि बड़े चुनावों में उन्हें मुंह की खानी पड़ी है। दरअसल राहुल गांधी हर बड़ी हार के बाद छोटी-छोटी जीतों में अपनी जीत तलाशते हैं और उनपर भी उतना ही दम-ख़म लगाते हैं, जबकि बाकी पार्टियां और नेता ऐसा करने में ज्यादा विश्वास नहीं रखते।

देखने में सुन्दर-आपने और हमने भी कई मौकों पर लोगों को ऐसा कहते सुना है कि राहुल गांधी में अपने पिता राजीव गांधी की झलक देखने को मिलती है। यहां तक कि राहुल लड़कियां में काफी लोकप्रिय भी हैं। कई मौकों पर लड़कियों को ऐसा कहते देखा गया है कि उन्हें उनके डिम्पल्स ( मुस्कुराते या हँसते समय, गालों में पडने वाले गड्ढे) अच्छे लगते हैं।

जब मंत्री पद लेने से किया इनकार-बात साल 2009 के लोकसभा चुनावों की है जब कांग्रेस को मिली जीत का श्रेय राहुल गांधी को भी दिया गया था। उस समय भी उन्होंने सरकार में कोई किरदार निभाने की बजाए पार्टी संगठन में काम करना पसंद किया और उन्होंने मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री का ओहदा लेने से साफ इंकार कर दिया था। 

शिक्षित-राहुल गांधी की शुरुआती शिक्षा दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल में हुई है। उन्होंने देश के प्रसिद्ध दून स्कूल में भी कुछ समय तक पढ़ाई की लेकिन राजीव गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों की वजह से कुछ अरसे तक उन्हें घर पर ही पढ़ाई-लिखाई करनी पड़ी। साल 1989 में उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में दाखि‍ला लिया। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के रोलिंस कॉलेज फ्लोरिडा से साल 1994 में अपनी कला स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने साल 1995 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलपमेंट स्टडीज में एम.फ़िल. की उपाधि हासिल की। अब आप खुद ही सोच सकते हैं कि वर्तमान में हमारे देश के कुछ चुनिन्दा नेताओं को छोड़ कर कितने नेता ऐसे हैं जो पढाई-लिखाई में राहुल के समकक्ष खड़े हो सकें? 

माँ से प्यार-अपनी माँ सोनिया गांधी के प्रति राहुल का प्यार किसी से छुपा हुआ नहीं है। अपने भाषणों में कई बार राहुल गांधी ने अपनी ज़िंदगी के भावुक पलों के साथ-साथ अपनी माँ, पिता और दादी के साथ बिताएं लम्हों को सबके साथ बांटते देखा गया है। यही नहीं राहुल गांधी माँ सोनिया गांधी के स्वास्थ के प्रति भी काफी सजग रहते हैं। 

बयानों की मर्यादा-बात अगर रैलियों की करी जाए तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की भाषा पर पकड़ शानदार है। राहुल गांधी ने अपने चुनाव अभियानों के दौरान किसी भी नेता पर कभी व्यक्तिगत हमला नहीं बोला लेकिन विपक्ष और खुद पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर निशाना साधने से कभी गुरेज नहीं किया।

राहुल की नेतृत्व क्षमता में असर-बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह चुनावी अखाड़े में अपनी टीम के साथ पूरे दम-खम के साथ उतरते हैं। वहीं इस बार अकेले राहुल गांधी ने बीजेपी की पूरी टीम को अपनी जबरदस्त नेतृत्व क्षमता की बदौलत टक्कर दी। दबे मुंह ही सही लेकिन कई लोग इस बात की प्रशंसा भी करते नजर आते हैं। 

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