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चुनावों में AI के सतर्क इस्तेमाल से ही होगा फायदा

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: March 7, 2024 11:08 IST

आगामी लोकसभा चुनाव पर एआई का साया मंडराने की राजनीतिक दलों की आशंका निराधार नहीं है और शायद यही कारण है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के आईटी सेल इसके मुकाबले के लिए कमर कस रहे हैं।

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ठळक मुद्देआगामी लोकसभा चुनाव पर एआई का साया मंडराने की राजनीतिक दलों की आशंका निराधार नहीं हैयही कारण है कि प्रमुख राजनीतिक दलों के आईटी सेल इसके मुकाबले के लिए कमर कस रहे हैंचुनाव आयोग ने भी इन चुनावों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद लेने का फैसला किया है

आगामी लोकसभा चुनाव पर एआई का साया मंडराने की राजनीतिक दलों की आशंका निराधार नहीं है और शायद यही कारण है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के आईटी सेल इसके मुकाबले के लिए कमर कस रहे हैं। चुनाव आयोग ने भी इन चुनावों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी की मदद लेने का फैसला किया है।

सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाओं को चिह्नित करने और हटाने के लिए ईसीआई के भीतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए एक विभाग बनाया गया है।

चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर झूठी और भड़काऊ सामग्री को हटाने का काम तेजी से किया जाएगा और यदि कोई पार्टी या उम्मीदवार नियमों का उल्लंघन करना जारी रखता है तो आयोग तत्काल कड़ी कार्रवाई करेगा।

जाहिर है कि यह काम आसान नहीं होगा क्योंकि एआई अब इतनी बारीकी से झूठ को सच की तरह पेश करता है कि उसे पहचान पाना अगर असंभव नहीं तो बेहद कठिन अवश्य हो गया है सिर्फ देश के भीतर से ही नहीं, एआई की मदद से अब विदेशों से भी किसी देश के चुनावों को प्रभावित किए जाने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।

वर्ष 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में डोनॉल्ड ट्रम्प की जीत में रूस की भूमिका का अंदेशा जताया गया था। उसके बाद से पिछले आठ वर्षों में तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का कल्पनातीत विकास हो चुका है।

करीब डेढ़ साल पहले लॉन्च हुआ जेनरेटिव आर्टिफशियल इंटेलिजेंस, चैट-जीपीटी ऐसी सामग्री तैयार कर सकता है जिससे मतदाताओं के लिए यह पता लगाना मुश्किल होगा कि उनके पास जो प्रचार सामग्री आई है वह असली है या नकली लेकिन यह भी सच है कि अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से अब हम चाहकर भी बच नहीं सकते और तटस्थ रहने की कोशिश करके इसका दुरुपयोग करने वालों पर लगाम नहीं लगा सकते।

इसलिए तकनीक का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग करना ही एकमात्र उपाय है। चुनावों के दौरान समय भी बहुत मायने रखता है। अगर किसी ने ऐन मतदान के पहले कोई बड़ा दुष्प्रचार फैला दिया तो उसका खंडन किए जाने तक बहुत बड़ा नुकसान हो चुकेगा! इसलिए सारी संभावनाओं पर पहले ही विचार करना जरूरी होगा कि किस परिस्थिति में क्या किया जाना उपयुक्त रहेगा।

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