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जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉग: कैसे लौटेगी देश की अर्थव्यवस्था में रफ्तार!

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: January 31, 2020 05:49 IST

नि:संदेह पूरा देश विभिन्न उभरती हुई आर्थिक चुनौतियों से राहत पाने की आस में नए बजट की ओर टकटकी लगाकर देख रहा है. ऐसे में उपयुक्त होगा कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण वर्ष 2020-21 के नए बजट के समक्ष दिखाई दे रही आर्थिक एवं वित्तीय चुनौतियों के बीच राजकोषीय घाटे की फिक्र न करते हुए ऐसे प्रोत्साहन देंगी जिससे आर्थिक वृद्धि हो सके, निवेश बढ़ सके, रोजगार बढ़ सके और देश आर्थिक सुस्ती से निपटने की डगर पर आगे बढ़ सके.

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हाल ही में 24 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टालिना जाजीर्वा ने दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) 2020 के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट अस्थायी है. ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था जल्दी ही सुस्ती के दौर से बाहर आ सकती है.

इसी तरह दुनिया के प्रसिद्ध मीडिया समूह ब्लूमबर्ग ने 24 जनवरी को अपनी रिपोर्ट में कहा कि अर्थव्यवस्था के 8 में से 5 सूचकांकों पर भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन सुधरते हुए दिखाई दे रहा है. अर्थव्यवस्था की स्थिति पिछले साल अगस्त 2019 के स्तर पर आ गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि विगत पांच महीनों में सर्विस सेक्टर की गतिविधियां बढ़ी हैं. औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है. बिजनेस एक्टिविटी बढ़ी है. कर्ज की मांग बेहतर हुई है. शेयर बाजार में तेजी बढ़ी है.

चूंकि इस समय किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण मांग बढ़ाने पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सकती है इसलिए नए बजट में कृषि और ग्रामीण विकास पर अधिक जोर जरूरी है. यदि नए बजट में किसानों को प्रत्यक्ष नकदी अंतरण के तहत अधिक धनराशि दी जाएगी तो ऐसा किए जाने से किसानों की आय उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाएगी. अनाज की खरीद में भी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के इस्तेमाल के लिए बजट में कोई नई योजना लाई जाना उपयुक्त होगा.

नए बजट में कृषि क्षेत्र की सब्सिडी खामियों को दूर करना उपयुक्त होगा. साथ ही नए बजट में 22 हजार ग्रामीण हाट को ग्रामीण कृषि बाजार में अपग्रेड करने के लिए राशि आवंटित की जाना उपयुक्त होगा. नि:संदेह अर्थव्यवस्था को गतिशील करने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा बुनियादी ढांचा क्षेत्र और निवेश को उच्च प्राथमिकता दी जानी होगी. वित्तमंत्री एक जनवरी 2020 को घोषणा कर चुकी हैं कि सरकार आगामी पांच वर्षो में बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परियोजनाओं में 102 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगी. ऐसे में वित्तमंत्री नए बजट के तहत बंदरगाहों, राजमार्गों और हवाई अड्डों के निर्माण पर व्यय बढ़ाते हुए दिखाई देंगी.

नि:संदेह नए बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, छोटे उद्योग-कारोबार और कौशल विकास जैसे विभिन्न आवश्यक क्षेत्रों के लिए बजट आबंटन बढ़ते हुए दिखाई दे सकता है. नए बजट में डिजिटल भुगतान के लिए भी नए प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं.

देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए वित्तमंत्री के द्वारा देश के सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) में नया जीवन फूंकना होगा. छोटे उद्यमियों ने मांग की है कि एमएसएमई द्वारा दी जाने वाली पेशेवर सेवाओं पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर 5 फीसदी की जाए, यह अभी 18 फीसदी है. इस समय एमएसएमई में बैंकों का एनपीए 70,000 करोड़ रुपए है, इसे वर्ष 2022 तक नियमित लोन माना जाए. मुश्किलों से घिरे छोटे व मध्यम उद्योगों को राहत देने के लिए बैंकों द्वारा एमएसएमई से वसूले जाने वाले सभी तरह के सर्विस चार्ज पूरी तरह माफ किए जाएं. जब एक एमएसएमई दूसरे एमएसएमई से कारोबार करे तो सर्विस चार्ज 5 फीसदी ही होना चाहिए, यह अभी 12 फीसदी है.

एमएसएमई सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए एक अलग पेंशन फंड बनाया जाना चाहिए. नए बजट 2020-21 के तहत वित्तमंत्री देश के छोटे आयकरदाताओं, नौकरी पेशा (सैलरीड) और मध्यम वर्ग के अधिकांश लोगों को लाभान्वित करते हुए दिखाई दे सकती हैं. नए बजट के माध्यम से मध्यम वर्ग को राहत देने और मध्यम वर्ग की क्रयशक्ति बढ़ाकर उद्योग-कारोबार को रफ्तार देने के लिए नए बजट के तहत विभिन्न प्रोत्साहनों की जरूरत है. देश और दुनिया के अर्थ विशेषज्ञों और उद्योग-कारोबार विशेषज्ञों का मत है कि वेतनभोगी और मध्यम वर्ग को कर राहत मिलने से उनके पास जो रुपए बचेंगे उससे मांग में वृद्धि होगी तथा उससे आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी.

नि:संदेह पूरा देश विभिन्न उभरती हुई आर्थिक चुनौतियों से राहत पाने की आस में नए बजट की ओर टकटकी लगाकर देख रहा है. ऐसे में उपयुक्त होगा कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण वर्ष 2020-21 के नए बजट के समक्ष दिखाई दे रही आर्थिक एवं वित्तीय चुनौतियों के बीच राजकोषीय घाटे की फिक्र न करते हुए ऐसे प्रोत्साहन देंगी जिससे आर्थिक वृद्धि हो सके, निवेश बढ़ सके, रोजगार बढ़ सके और देश आर्थिक सुस्ती से निपटने की डगर पर आगे बढ़ सके. अब यदि भारत निवेश और खपत में वृद्धि करने के लिए अधिक राजकोषीय प्रोत्साहन व संरचनात्मक सुधारों की रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा, तो आने वाले समय में भारत की विकास दर 6.6 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकती है.

हम आशा करें कि आगामी वर्ष 2020-21 के नए बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण वैश्विक सुस्ती के बीच अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाए रखने के लिए, आम आदमी की क्रयशक्ति बढ़ाने के लिए कृषि, ग्रामीण विकास, बुनियादी ढांचा, छोटे उद्योग, मध्यम वर्ग और रोजगार वृद्धि जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देंगी. निश्चित रूप से ऐसा होने पर भारतीय अर्थव्यवस्था रफ्तार लेते हुए दिखाई दे सकेगी.

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