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भरत झुनझुनवाला का ब्ल़ॉग: फिसलता विश्व व्यापार संगठन

By भरत झुनझुनवाला | Updated: January 1, 2019 00:30 IST

कुछ वर्ष पूर्व अमेरिका ने भारत से आयातित स्टील पर भी आयात कर बढ़ा दिए थे. तब भी डब्ल्यूटीओ ने निर्णय दिया था कि अमेरिका द्वारा लगाए गए आयात कर अनुचित हैं. इसी क्रम में चीन और अमेरिका में चल रहे ट्रेड वार को भी देखा जाना चाहिए.

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 वर्ष 2015 में भारत ने जापान से आयातित कुछ विशेष प्रकार के स्टील पर आयात कर बढ़ा दिए थे. भारत का कहना था कि अपने घरेलू स्टील उद्योगों को बचाने के लिए जापान से हो रहे स्टील के आयात पर आयात कर बढ़ाना जरूरी था. हाल में विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ ने निर्णय दिया है कि भारत द्वारा लगाए गए ये आयात कर अनुचित थे. 

कुछ वर्ष पूर्व अमेरिका ने भारत से आयातित स्टील पर भी आयात कर बढ़ा दिए थे. तब भी डब्ल्यूटीओ ने निर्णय दिया था कि अमेरिका द्वारा लगाए गए आयात कर अनुचित हैं. इसी क्रम में चीन और अमेरिका में चल रहे ट्रेड वार को भी देखा जाना चाहिए. अमेरिका का कहना है कि चीन के सस्ते आयात उसके अपने घरेलू उद्योगों को नष्ट कर रहे हैं. इसलिए राष्ट्रपति ट्रम्प ने चीन से आयातित माल पर आयात कर बढ़ा दिए हैं. इन प्रकरणों से स्पष्ट होता है कि प्रमुख देशों के लिए मुक्त व्यापर अब लाभ का सौदा नहीं रह गया है. अब इससे उन्हें हानि दिखने लग गई है. इसलिए तमाम देश मुक्त व्यापार से पीछे हट रहे हैं. 

 इसमें उन देशों के लिए विशेष संकट है जिनके वर्तमान में वेतन अधिक हैं. जैसे अमेरिका और जापान के लिए अपने माल को विश्व बाजार में बेचना कठिन होता जा रहा है क्योंकि वही माल भारत और वियतनाम सस्ता बनाकर विश्व बाजार में बेच रहे हैं. हमें समझ लेना चाहिए कि मुक्त व्यापार का तार्किक परिणाम होता है कि विश्व के सभी देशों में श्रमिक के वेतन बराबरी पर आएंगे.

चूंकि अमेरिका और जापान अपने श्रमिकों के वेतन विश्व के एक स्तर पर लाने को तैयार नहीं हैं, वे अपने श्रमिकों का वेतन ऊंचा बनाए रखना चाहते हैं, इसलिए अमेरिका और जापान जैसे विकसित देश विशेष रूप से मुक्त व्यापार से पीछे हटेंगे और आने वाले समय में हम मुक्त व्यापार का विघटन देखेंगे. भारत को भी समय रहते मुक्त व्यापार से पीछे हटने की तैयारी करनी चाहिए और अपने घरेलू उद्योगों को संरक्षण देकर अपनी जनता का हित करना चाहिए. 

टॅग्स :इकॉनोमी
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