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वर्ष 2025 में 95 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा योजना से लाभान्वित?, दायरे को और बढ़ाएं

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: July 5, 2025 05:25 IST

आईएलओ के महानिदेशक गिल्बर्ट एफ हुंगबो ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा में विश्व स्तर पर भारत ने दूसरा स्थान हासिल किया है.

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ठळक मुद्देदेश के असंगठित क्षेत्र, गिग वर्कर्स और आम आदमी की सामाजिक सुरक्षा के लिए अभी मीलों चलना बाकी है.दुनिया में सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आने वाले लोगों की संख्या भारत में सबसे तेजी से बढ़ी है.जनकेंद्रित कल्याणकारी नीतियों से सामाजिक सुरक्षा का तेज विस्तार हुआ है.

हाल ही में 29 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी मासिक ‘मन की बात’ रेडियो प्रसारण में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में इस वर्ष 2025 में 64 फीसदी से अधिक आबादी यानी करीब 95 करोड़ लोग किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना से लाभान्वित हो रहे हैं, जबकि वर्ष 2015 में सामाजिक सुरक्षा योजनाएं 25 करोड़ से भी कम लोगों तक पहुंच रही थीं. यह  सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक न्याय की बेहतरीन तस्वीर है. निश्चित रूप से सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना सुकूनदायक है, लेकिन अभी भी देश के करीब 52 करोड़ लोगों का सामाजिक सुरक्षा की छतरी के बाहर रहना एक बड़ी आर्थिक-सामाजिक चुनौती है. खासतौर पर देश के असंगठित क्षेत्र, गिग वर्कर्स और आम आदमी की सामाजिक सुरक्षा के लिए अभी मीलों चलना बाकी है.

गौरतलब है कि आईएलओ के महानिदेशक गिल्बर्ट एफ हुंगबो ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा में विश्व स्तर पर भारत ने दूसरा स्थान हासिल किया है. पिछले एक दशक में दुनिया में सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आने वाले लोगों की संख्या भारत में सबसे तेजी से बढ़ी है. भारत में गरीबों और मजदूर वर्ग के लिए सरकार की जनकेंद्रित कल्याणकारी नीतियों से सामाजिक सुरक्षा का तेज विस्तार हुआ है.

यह बात भी महत्वपूर्ण है कि आईएलओ ने अपने आकलन में केंद्र और राज्य सरकार की 32 योजनाओं के आंकड़े शामिल किए हैं, जिनमें 24 योजनाएं पेंशन से जुड़ी हुई हैं. इन योजनाओं में अटल पेंशन योजना, किसान सम्मान निधि, मनरेगा, जननी सुरक्षा योजना और पीएम पोषण जैसी योजनाएं शामिल हैं.

प्रत्येक योजना पर विचार करने के लिए आईएलओ के मानदंडों में योजना को विधायी रूप से समर्थन प्राप्त होना, नगद और सक्रिय होना और पिछले तीन वर्षों के सत्यापित समयबद्ध आंकड़े प्रदान किया जाना शामिल है. एक चिंताजनक प्रश्न यह भी है कि बचत योजनाओं पर कम ब्याज दर के कारण देश के उन करोड़ों छोटे निवेशकों का दूरगामी सामाजिक आर्थिक प्रबंधन गड़बड़ा रहा है, जो अपनी छोटी बचतों के जरिये जिंदगी के कई महत्वपूर्ण कामों को निपटाने की व्यवस्था सोचे हुए हैं.

अतएव अब सरकार को देश के इस वर्ग की सामाजिक सुरक्षा मजबूत बनाने के लिए और गंभीरतापूर्वक ध्यान देना होगा. अब सरकार को इस ओर भी अवश्य ध्यान देना होगा कि वह निजी क्षेत्र तथा असंगठित क्षेत्रों में सेवा देने वाले करोड़ों लोगों के लिए उपयुक्त पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के लिए गंभीरतापूर्वक आगे बढ़े और निजी क्षेत्र की पेंशन योजनाओं को आकर्षक बनाए.

टॅग्स :नरेंद्र मोदीनिर्मला सीतारमणमन की बात
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