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बांग्लादेश चुनाव 2026ः एनसीपी के 30 नेताओं का विरोध और 2 ने दिया इस्तीफा, जमात-ए-इस्लामी के साथ गठजोड़ पर विरोध

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: December 28, 2025 16:51 IST

Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश की स्वतंत्रता के विरुद्ध उसकी भूमिका तथा 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान नरसंहार और अपराध में कथित सहयोग की ओर इशारा किया गया है।

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ठळक मुद्देएसएडी ने पिछले वर्ष हुए हिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसे ‘जुलाई विद्रोह’ कहा जाता है।बांग्लादेश की लोकतांत्रिक भावना और एनसीपी के मूल मूल्यों से मेल नहीं खाती।विवादास्पद राजनीतिक इतिहास की ओर भी इशारा किया गया है।

ढाकाः बांग्लादेश में फरवरी में प्रस्तावित चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी के साथ प्रस्तावित गठबंधन के प्रस्ताव को लेकर छात्र नेतृत्व वाली ‘नेशनल सिटिजन पार्टी’ (एनसीपी) में रातों रात आंतरिक फूट देखी जा रही है। दरअसल, पार्टी के 30 नेताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए एक संयुक्त पत्र जारी किया है जबकि दो वरिष्ठ सदस्यों ने अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी है। एनसीपी, ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन’ (एसएडी) का एक बड़ा राजनीतिक धड़ा है। एसएडी ने पिछले वर्ष हुए हिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसे ‘जुलाई विद्रोह’ कहा जाता है।

इस आंदोलन के परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। एनसीपी फरवरी में अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के समर्थन से एक राजनीतिक दल के रूप में उभरी। ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले पहले व्यक्ति एवं एनसीपी के संयुक्त सदस्य-सचिव मुशफिक उस सलीहीन ने शनिवार रात संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने ‘‘जुलाई विद्रोह की जवाबदेही और पार्टी मूल्यों के संदर्भ में संभावित गठबंधन पर सैद्धांतिक आपत्तियां’’ शीर्षक वाला ज्ञापन पार्टी संयोजक नाहिद इस्लाम को भेज दिया है।

ज्ञापन में जमात के साथ गठबंधन को लेकर गंभीर चिंताएं जताते हुए कहा गया कि यह पार्टी की घोषित विचारधारा, ‘जुलाई विद्रोह’ पर उसके रुख और लोकतांत्रिक नैतिकता के विपरीत है। इसमें जमात के विवादास्पद राजनीतिक इतिहास की ओर भी इशारा किया गया है। विशेष रूप से बांग्लादेश की स्वतंत्रता के विरुद्ध उसकी भूमिका तथा 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान नरसंहार और अपराध में कथित सहयोग की ओर इशारा किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि ये सब बांग्लादेश की लोकतांत्रिक भावना और एनसीपी के मूल मूल्यों से मेल नहीं खाती।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जमात के छात्र संगठन ‘छात्र शिविर’ ने हाल में अन्य पार्टियों में सेंध लगाकर उन्हें नुकसान पहुंचाने की विभिन्न घटनाओं के लिए एनसीपी को दोषी ठहराने और गलत सूचना एवं दुष्प्रचार फैलाने का प्रयास किया। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि जमात के साथ प्रस्तावित गठबंधन से एनसीपी की राजनीतिक विश्वसनीयता और जनविश्वास को ठेस पहुंचेगी,

जिससे “हमारे कई कार्यकर्ताओं और समर्थकों, विशेषकर नई राजनीति का समर्थन करने वाली युवा पीढ़ी व आम नागरिकों के बीच भ्रम व निराशा उत्पन्न होगी। यह ज्ञापन तब सार्वजनिक किया गया, जब एनसीपी की वरिष्ठ संयुक्त सदस्य-सचिव तसनीम जारा ने शनिवार शाम को अपने पद से इस्तीफा दे दिया और राजधानी ढाका के एक निर्वाचन क्षेत्र से आगामी संसदीय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा की।

जारा ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए मैंने किसी भी विशेष पार्टी या गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है।’’ हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इस्तीफा जमात के साथ प्रस्तावित गठबंधन से जुड़ा है या नहीं,

लेकिन अखबारों की खबरों में कहा गया है कि उनके पति और पार्टी के संयुक्त संयोजक खालिद सैफुल्लाह ने भी संगठन छोड़ दिया है। अखबार ‘इत्तेफाक’ ने शनिवार को बताया था कि एनसीपी की अधिकतर महिला नेता जैसे वरिष्ठ संयुक्त संयोजक समता शरमिन, वरिष्ठ सदस्य-सचिव नाहिद सरवार नीवा, संयुक्त संयोजक तजनुवा जाबिन और संयुक्त सदस्य-सचिव नुसरत तबस्सुम जमात या किसी भी धर्म-आधारित पार्टी के साथ गठबंधन के खिलाफ हैं और उन्होंने पार्टी के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। हालांकि, ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में अधिकतर एनसीपी के पुरुष सदस्य हैं।

एनसीपी ने अब तक अपने प्रस्तावित गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन ‘डेली स्टार’ अखबार ने कहा है कि पार्टी अगले एक-दो दिनों में जमात के साथ सीट-बंटवारे के समझौते को अंतिम रूप दे सकती है। इस बीच, जमात के महासचिव मिया गोलाम परवार ने अखबार से कहा कि एनसीपी के साथ उनकी बातचीत एक-एक सीट के आधार पर हो रही है और ‘‘सीट साझा करने की संभावना है, मामला बहुत जल्द साफ हो जाएगा।’’

‘प्रथम आलो’ अखबार ने पहले बताया था कि एनसीपी और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के बीच भी सीट-बंटवारे की संभावना पर चर्चा हुई थी ‘‘लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।’’ खबर में कहा गया है, ‘‘उसके बाद एनसीपी और जमात के बीच बातचीत सकारात्मक रूप से आगे बढ़ी।’’ 

टॅग्स :बांग्लादेशचुनाव आयोगशेख हसीनाखालिदा जिया
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