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जर्मनी से 12 माह में 5,000 सैनिकों को वापस बुलाएगा अमेरिका?, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा-ईरान से हार रहे?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 2, 2026 17:57 IST

पिस्टोरियस ने जर्मन समाचार एजेंसी ‘डीपीए’ से बातचीत में कहा,‘‘यूरोप में, और विशेष रूप से जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति हमारे और अमेरिका दोनों के हित में है।’’

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ठळक मुद्देजर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा था कि ईरानी नेतृत्व द्वारा अमेरिका को ‘‘अपमानित’’ किया जा रहा है।इतना ही नहीं, मर्ज ने युद्ध में वाशिंगटन की खराब रणनीति की आलोचना की थी। युद्ध क्षेत्र की आवश्यकताओं और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

वाशिंगटन:अमेरिका अगले छह से बारह महीनों में जर्मनी से अपने करीब 5,000 सैनिकों को वापस बुलाएगा। पेंटागन ने यह जानकारी दी। अमेरिका का यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के अनुरूप है, जो उन्होंने ईरान के साथ अमेरिकी युद्ध को लेकर जर्मन नेता के साथ चल रहे टकराव के दौरान दी थी। ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगी जर्मनी से कुछ सैनिकों को वापस बुलाने की धमकी उस वक्त दी थी, जब जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा था कि ईरानी नेतृत्व द्वारा अमेरिका को ‘‘अपमानित’’ किया जा रहा है।

इतना ही नहीं, मर्ज ने युद्ध में वाशिंगटन की खराब रणनीति की आलोचना की थी। पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने एक बयान में कहा, ‘‘यह निर्णय यूरोप में विभाग की सैन्य स्थिति की गहन समीक्षा के बाद लिया गया है और यह युद्ध क्षेत्र की आवश्यकताओं और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।’’

जर्मनी में कई अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं, जिनमें यूरोप और अफ्रीकी कमानों का मुख्यालय, रामस्टीन वायुसेना और लैंडस्टुहल में एक चिकित्सा केंद्र शामिल है, जहां अफगानिस्तान और इराक युद्धों में घायल हुए लोगों का इलाज किया जाता था। इस यूरोपीय देश में अमेरिकी परमाणु मिसाइलें भी तैनात हैं। जर्मनी छोड़ने वाले सैनिकों की संख्या वहां तैनात 36,000 अमेरिकी सैन्यकर्मियों का 14 प्रतिशत होगी।

जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि इसकी आशंका पहले से थी कि अमेरिका, यूरोप और जर्मनी से अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा। इसके साथ ही उन्होंने यूरोपीय महाद्वीप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति से पारस्परिक लाभ पर जोर देने की कोशिश की।

पिस्टोरियस ने जर्मन समाचार एजेंसी ‘डीपीए’ से बातचीत में कहा,‘‘यूरोप में, और विशेष रूप से जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति हमारे और अमेरिका दोनों के हित में है।’’ उन्होंने कहा कि यूरोपीय सहयोगियों को अपनी रक्षा रणनीति में बदलाव करने की आवश्यकता है, और वे ऐसा कर रहे हैं।

पिस्टोरियस ने कहा, ‘‘हम यूरोपियों को अपनी सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।’’ उन्होंने जर्मनी द्वारा अपने सशस्त्र बलों को मजबूत करने, खरीद में तेजी लाने और बुनियादी ढांचे को विकसित करने के हालिया प्रयासों पर जोर दिया।

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