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चार साल के मासूम ने अपनी जिंदगी हारकर बचा ली तीन लोगों की जान, जानिए पूरा मामला

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: April 13, 2022 16:21 IST

बीते 2 अप्रैल को बरनाला में 4 साल के गुरजोत को सिर में गंभीर चोट लगी। इलाज के दौरान 9 अप्रैल को पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने गुरजोत को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद गुरजोत के मां-बाप ने उसके अंगों को दान कर दिया। जिसे तीन अन्य मरीजों में प्रत्यारोपित करके उनकी जान बचा ली गई।

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ठळक मुद्देब्रेन डेड गुरजोत इस दुनिया से जाते-जाते तीन लोगों को जिंदगी जीने का सबब दे गयापंजाब के बरनाला में 2 अप्रैल को 4 साल के गुरजोत को सिर में गंभीर चोट लगी थी9 अप्रैल को पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने गुरजोत को ब्रेन डेड घोषित कर दिया था

चंडीगढ़: चार साल का एक मासूम अपनी जिंदगी तो न जी सका लेकिन उसने तीन मरीजों को जीवनदान देकर इस संसार से विदा दे ली। जी हां, पीजीआई चंडीगढ़ ने जिस बच्चे को ब्रेन डेड घोषित कर दिया था वो जाते-जाते तीन लोगों को जिंदगी जीने का सबब दे गया।

जानकारी के मुताबिक बीते 2 अप्रैल को बरनाला में 4 साल के गुरजोत को सिर में गंभीर चोट लगी। माता-पिता उसे इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ में ले गये, जहां इलाज के दौरान 9 अप्रैल को डॉक्टरों ने गुरजोत को ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

इसके बाद गुरजोत के मां-बाप के सामने तो अंधेरा ही छा गया लेकिन उन्होंने हिम्मत से काम लिया और इस संसार से गुरजोत की विदाई को यादगार बनाने के लिए फैसला लिया कि गुरजोत के स्वस्थ्य अंगों को प्रत्यारोपित करते जरूरतमंद मरीजों को दान में दे दिया जाए।

अंग्रेजी समाचार पत्र 'द इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित खबर के मुताबिक गुरजोत के पिता ने कहा, "हमारे लिए तो गुरजोत को खोने का खालीपन कभी नहीं भर पाएगा। हमारी बदकिस्मती है, जो वह अपना पांचवां जन्मदिन मनाने के लिए हमारे साथ नहीं होगा। लेकिन हमें इस बात का संतोष है कि गुरजोत का जीवन औरों में चलेगा और उनके साथ वो अपने दिन बिताएगा।"

इस मामले में चंडीगढ़ पीजीआई के डायरेक्टर प्रोफेसर सुरजीत सिंह ने गुरजोत के परिवार के इस फैसले की सराहना करते हुए कहा, “पीजीआई इस बात के लिए धन्यवाद देती है गुरजोत के परिवाप को और उनके माता-पिता के फैसले की सहारना करती है, जिसके कारण तीन लोगों को जीवन का उपहार मिला। इसके साथ ही मैं गुरजोत के अंग प्रत्यारोपण करने वाली टीम को भी बधाई देता हूं कि उन्होंने पूरी मेहनत और लगन के साथ ये अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की है।"

बताया जा रहा है कि गुरजोत का लीवर को दिल्ली में जिगर और पित्त विज्ञान संस्थान में एक रोगी को ट्रांसप्लांट किया गया। दान किए गए लीवर को सड़क मार्ग से ले जाने के लिए चंडीगढ़ से दिल्ली तक एक स्पेशल ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था और 10 अप्रैल को इसे मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित कर दिया गया। वहीं दो अन्य मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ में ही गुर्दे और अग्न्याशय प्रत्यारोपित किये गये। 

टॅग्स :चंडीगढ़PGI ChandigarhILBS
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