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पटना स्थित राज्य महिला आयोग के दफ्तर में प्रेमी जोड़े ने की शादी, लड़के ने आयोग के सदस्यों की मौजूदगी में लड़की की मांग भरी

By एस पी सिन्हा | Updated: April 3, 2026 18:15 IST

लगभग दो घंटे तक चली खींचतान और बहसबाजी के बाद अंततः लड़के ने आयोग के सदस्यों की मौजूदगी में लड़की की मांग भरी और उसे अपनी पत्नी स्वीकार किया।

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पटना: बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को राज्य महिला आयोग के दफ्तर में उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब एक प्रेमी जोड़े ने आयोग के अधिकारियों के सामने विवाह करने का निर्णय लिया। हालांकि परिजनों के कड़े विरोध के चलते कार्यालय परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया और स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सुरक्षा के लिए 'डायल 112' की पुलिस टीम को बुलाना पड़ा। लगभग दो घंटे तक चली खींचतान और बहसबाजी के बाद अंततः लड़के ने आयोग के सदस्यों की मौजूदगी में लड़की की मांग भरी और उसे अपनी पत्नी स्वीकार किया।

जानकारी के अनुसार, पटना के खाजेकला निवासी रौशन कुमार और संपतचक की विजया शेखर के बीच ढाई साल पहले प्यार शुरू हुआ। विजया, रौशन के घर में बतौर किराएदार रह रही थीं और यहीं से दोनों के दिल एक हो गए। दोनों ने जुलाई 2025 में छिपकर कोर्ट मैरिज कर ली थी, लेकिन लड़के के परिवार ने इस रिश्ते का सख्त विरोध किया। रौशन की मां ने जब शादी का पता चला तो बेटे को संपत्ति से बेदखल कर दिया और विजया को धमकाना शुरू कर दिया। थक-हारकर जोड़ा महिला आयोग पहुंचा। 

आयोग की अध्यक्ष प्रो. अप्सरा मिश्रा ने लड़के की मां और परिजनों को घंटों समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी बात पर अड़े रहे। लड़के की मां का कहना था कि उन्हें यह ‘लव मैरिज’ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है। इस दौरान वहां परिजनों ने जमकर हंगामा किया और जोड़े को अलग करने की कोशिश की, जिसके कारण आयोग परिसर में घंटों अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। हंगामे को बढ़ता देख आयोग के कार्यालय में तैनात कर्मियों ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया। 

पुलिस के हस्तक्षेप और आयोग के सदस्यों द्वारा समझाए जाने के बाद स्थिति कुछ हद तक शांत हुई। चूंकि दोनों बालिग थे और एक-दूसरे के साथ रहने पर अड़े थे। लेकिन भारी विरोध और हंगामे के बीच एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका की मांग में सबके सामने सिंदूर भरकर उसे अपनी पत्नी स्वीकार किया। शादी संपन्न होने के बाद भी दोनों पक्षों के बीच तनाव बरकरार है, जिसे देखते हुए महिला आयोग ने मामले को अपनी प्राथमिकता में रखा है। 

आयोग अब इस नवविवाहित जोड़े की सुरक्षा की सीधी निगरानी कर रहा है ताकि घर लौटने पर उन्हें किसी प्रकार के शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न का सामना न करना पड़े। अधिकारियों का कहना है कि बालिग होने के नाते उन्हें अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार है और इसकी रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

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