गुरु नानक का जन्म 29 नवंबर 1469 ई. में खत्री परिवार के पिता महता कालू के यहां माता तृप्ता की कोख से हुआ था। रावी नदी के किनारे बसे राय भोए की तलवंडी गांव में कार्तिक पूर्णिमा की अंधेरी रात में गुरु जी ने अवतार धारण किया था। गुरु नानक बचपन से ही बेहद समझदार थे। उन्होंने हिंदी, संस्कृत और फारसी भाषा का ज्ञान लिया। चार उदासियों में यात्रा की। गुरु नानक का विवाह माता सुलखनी से हुआ। उनसे उन्हें दो पुत्रों की प्राप्ति हुई - श्री चंद और लक्ष्मी दास। Read More
पाकिस्तान ने कहा कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक के जन्मस्थान को ‘‘किसी ने छुआ नहीं है और न ही उसे कोई नुकसान पहुंचाया है तथा सिख धर्म के पवित्र स्थलों में से एक में ‘‘तोड़फोड़ किये जाने के दावे’’ गलत हैं। ...
इंडियाना से रिपब्लिक पार्टी के सांसद टोड यंग ने इस मौके पर सदन में एक प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि सिख-अमेरिकी देशभर में गहरा असर छोड़ने में कामयाब रहे हैं क्योंकि उन्होंने पहले सिख गुरु की शिक्षाओं का अनुसरण किया। ...
मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सिक्खों के गुरु, गुरु नानक देव जी ने संवत् 1526 में अवतरण लिया था। इसीलिए इस दिन को पूरा सिक्ख समुदाय उत्साह और उल्लास से मनाता है। ...
गुरु नानक देव ने सिक्ख धर्म की स्थापना की थी। बचपन से ही गुरु नानक देव ने अपने व्यक्तिव में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्म-सुधारक, समाजसुधारक जैसे गुण थे। ...
गुरु नानक देव ने सिक्ख धर्म की स्थापना की थी। बचपन से ही गुरु नानक देव ने अपने व्यक्तिव में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्म-सुधारक, समाजसुधारक जैसे गुण थे। ...
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा, ‘‘अक्सर ही इसे देशभक्ति मान लिया जाता है और दोनों को एक दूसरे की जगह इस्तेमाल में लाया जाता है। लेकिन दोनों ही अस्थिर एवं विस्फोटक विषय-वस्तु वाले शब्द हैं तथा इनका सावधानी के साथ इस्तेमाल किये जाने की जरूरत है ...
करतारपुर साहिब इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि गुरु नानक देव जी ने यहां अपनी आखिरी सांसे ली थी। सिर्फ यही नहीं अपने जीवन के 18 वर्ष उन्होंने यही गुजारे थे। ...