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Good Friday 2020: ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था इस दिन, फिर भी क्यों कहते हैं इसे गुड फ्राइडे, जानिए

By मनाली रस्तोगी | Updated: April 9, 2020 15:37 IST

इस बार गुड फ्राइडे (Good Friday 2020) 10 अप्रैल को है। जानिए आखिर क्या है गुड फ्राइडे का इतिहास और इस दिन का महत्व क्या है?

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ठळक मुद्देईसाई समुदाय के लोग गुड फ्राइडे के दिन प्रसाद स्वरूप गर्म मीठी रोटियां खाते हैं।गुड फ्राइडे के बाद पड़ने वाले रविवार को ईस्‍टर के रूप में मनाया जाता है।

ईसाई धर्म में 'गुड फ्राइडे' का काफी महत्व है। यह दिन प्रभु ईसा मसीह के बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है।इसी दिन प्रभु यीशू को सूली पर चढ़ाया गया था। यह हफ्ता ईसाई धर्म के लोगों के लिए बहुत खास है। कहते हैं कि 'गुड फ्राइडे' के तीसरे दिन रविवार को यीशु फिर से जिंदा हो  गए थे और उसे ही ईस्टर के तौर पर मनाया जाता है। ऐसे में आपके मन में  सवाल होगा कि जब शुक्रवार को प्रभु ईसा मसीह को सूली पर चढ़ा दिया गया तो आखिर फिर इसे 'गुड फ्राइडे' क्यों कहते  हैं ? आखिर क्या है इसका महत्व, जानिए

जानिए गुड फ्राइडे का इतिहास

ये सबको मालूम है कि गुड फ्राइडे के दिन ही प्रभु यीशू को सूली पर चढ़ाया गया था। ऐसे में सबके मन में ये सवाल आता है कि इसे फिर गुड फ्राइडे क्यों कहते हैं। इसके पीछे का कारण ये है कि प्रभु यीशु ने मनुष्य जाति की भलाई के लिए अपनी जान दांव पर लगाई थी। इसलिए इसे प्रेरणास्रोत के तौर पर 'गुड फ्राइडे' कहा जाता है।

वैसे गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्‍लैक फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे के नाम से भी संबोधित किया जाता है। ऐसे में लोग इस दिन चर्च काले कपड़े पहनकर ही जाते हैं और प्रार्थना करते हैं। साथ ही, इस दिन लोग चर्च जाकर प्रभु यीशु से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।

कैसे सूली पर चढ़ाए गए थे ईसा मसीह?

ईसा मसीह मानवता के प्रतीक थे, जो लोगों को सच्चाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित करते थे। हालांकि, अत्‍याचारियों और पापियों ने प्रभु यीशु पर भी काफी जुल्म ढहाया। उनके अंतिम समय में उन्हें सूली पर चढ़ाते हुए पापियों ने कांटों का ताज पहनाया। मगर अपने अंतिम समय में भी ईसा मसीह ने कहा कि हे ईश्‍वर, इन्‍हें क्षमा करें, ये नहीं जानते कि ये क्‍या कर रहे हैं। 

ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ बाइबिल में बताया गया है कि अत्‍याचारियों और पापियों ने प्रभु यीशू को 6 घंटे तक सूली पर लटके रहने दिया था। मगर जितने समय वह सूली पर लटके हुए थे, उस दौरान आकाश में अचानक से अंधेरा हो गया था और बिजली चमक रही थी। यही कारण है कि चर्च में दोपहर 3 बजे पर प्रार्थना सभा होती है।

गुड फ्राइडे के दिन ईसाई समुदाय के लोग प्रसाद स्वरूप गर्म मीठी रोटियां भी खाते हैं। इसके साथ चर्च में इस दिन लोग घंटी नहीं बजाते, बल्कि लकड़ी के खटखटे से आवाज की जाती है।

गुड फ्राइडे के 3 दिन बाद मनाया जाता है ईस्टर

बाइबिल में बताया गया है कि अपनी मौत के 3 दिन बाद प्रभु यीशु जीवित हो गए थे और उस दिन रविवार था। ऐसे में गुड फ्राइडे के 3 दिन बाद ईस्टर मनाया जाता है। इसके अलावा ईसा मसीह की कृतज्ञता को व्यक्त करते हुए ईसाई समुदाय के लोग 40 दिन का व्रत भी रखते हैं।

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