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श्रमिकों में बेरोजगारी का डर, कई उद्योग संकट में, सरकार प्रवासी मजदूरों पर सोचें: विजय दर्डा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 14, 2020 15:33 IST

कोरोना वायरस महामारी में बेपटरी हुई अर्थव्यवस्था और प्रवासी मजदूरों के हालात को लेकर पूर्व सांसद विजय दर्डा ने चिंता जाहिर की है.

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ठळक मुद्देउद्योग जगत में मंडराते संकट के बादल पर विजय दर्डा ने कोविड-19 के चलते विशाल बेरोजगारी की आशंका जाहिर की 3 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिए जाने पर भी बंद उद्योगों को कैसे लाभ होगा?

लोकमत एडिटोरियल बोर्ड के चेयरमैन व पूर्व सांसद विजय दर्डा ने कोरोना वायरस महामारी से अर्थव्यवस्था में उपजे संकट और प्रवासी मजदूरों की स्थिति पर चिंता जाहिर की है। 'फिर उड़ान-चुनौतियां व अवसर' के तहत हुए लोकमत वेबिनार सीरीज में विजय दर्डा ने कहा, कोविड -19 के कारण देश में 14 से 15 करोड़ श्रमिकों के बीच बेरोजगारी का डर है। देश के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कई उद्योग मुश्किल में हैं। उन्हें बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

एमएसएमई सेक्टर को मिले क्रेडिट फ्री लोन पर उन्होंने कहा, 3 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिए जाने पर भी बंद उद्योगों को कैसे लाभ होगा, प्रवासी श्रमिक कैसे लौटेंगे? यदि वे वापस नहीं आएंगे तो उद्योग कैसे कार्य करेगा और कच्चे माल, कुशल श्रमिक कहां से आएंगे इन सवालों पर विचार करने की आवश्यकता है। वर्तमान में उद्योग जगत में मंडराते संकट के बादल पर विजय दर्डा ने कोविड-19 के चलते विशाल बेरोजगारी की आशंका जाहिर की। उन्होंने कहा, MSME का योगदान हमारी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन अभी छोटे व्यवसाय से लेकर बड़े कॉरपोरेशन तक संकट में हैं। 

20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है। लॉकडाउन के संबंध में विजय दर्डा ने बताया कि हम कई कमियों और त्रुटियों को इंगित कर सकते हैं, लेकिन देशव्यापी बंद ने हमें महामारी को नियंत्रित करने में मदद की है।

'फिर उड़ान-चुनौतियां व अवसर' के हुए लोकमत वेबिनार सीरीज में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग मंत्री नितिन गडकरी, एसोचैम के अध्यक्ष निरंजन हिरानंदानी, ऑल इंडिया मैन्युफेक्चरिंग ऑर्गेनाइजेशन' के पूर्व अध्यक्ष केई रघुनाथन, पूनावाला फायनेंस के एमडी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभय भुतड़ा और बीएसई-एमएसई के सीईओ अजय ठाकुर ने भी हिस्सा लिया।

टॅग्स :आर्थिक पैकेजइकॉनोमीलोकमत समाचार
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