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तीन महिला न्यायाधीशों ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली

By भाषा | Updated: August 31, 2021 17:57 IST

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उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में मंगलवार को तीन महिला न्यायाधीशों ने पद की शपथ ली। इनमें न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना भी शामिल हैं जो सितम्बर 2027 में भारत की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बनने की कतार में हैं। न्यायमूर्ति हिमा कोहली, न्यायमूर्ति नागरत्ना और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी के शपथ ग्रहण से पहले मौजूदा न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी समेत केवल आठ महिला न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।उच्चतम न्यायालय 26 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया था। अपनी स्थापना के बाद से और पिछले लगभग 71 वर्षों में केवल आठ महिला न्यायाधीशों को देखा गया है, जिसकी शुरुआत 1989 में न्यायमूर्ति एम फातिमा बीवी के साथ हुई थी। उच्चतम न्यायालय में नियुक्त सात अन्य महिला न्यायाधीश हैं - न्यायमूर्ति सुजाता वी मनोहर, रूमा पाल, ज्ञान सुधा मिश्रा, रंजना पी देसाई, आर भानुमति, इंदु मल्होत्रा और इंदिरा बनर्जी। न्यायमूर्ति हिमा कोहली पदोन्नति से पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थी। दो सितंबर 1959 को दिल्ली में जन्मी न्यायमूर्ति कोहली ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की थी। वह 1999-2004 तक दिल्ली उच्च न्यायालय में नई दिल्ली नगर परिषद की स्थायी वकील और कानूनी सलाहकार थीं। उन्हें 29 मई, 2006 को दिल्ली उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया और 29 अगस्त, 2007 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। न्यायमूर्ति नागरत्ना सितंबर 2027 में पहली महिला प्रधान न्यायाधीश बनने की कतार में हैं। न्यायमूर्ति नागरत्ना का 30 अक्टूबर 1962 को जन्म हुआ था और वह पूर्व प्रधान न्यायाधीश ई एस वेंकटरमैया की बेटी हैं। न्यायमूर्ति नागरत्ना को फरवरी 2008 में कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और बाद में उन्हें वहां स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। न्यायमूर्ति त्रिवेदी का जन्म जून 1960 में हुआ था। उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत होने से पहले वह गुजरात उच्च न्यायालय की न्यायाधीश थी। वह फरवरी 2011 में गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुई थी। उच्चतम न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीवी को छह अक्टूबर, 1989 को नियुक्त किया गया था और वह शीर्ष अदालत से 29 अप्रैल 1992 को सेवानिवृत्त हुईं। वह अप्रैल 1989 में उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त हुई थीं और बाद में उन्हें उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। न्यायमूर्ति मनोहर को नवंबर 1994 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और वह 27 अगस्त, 1999 को सेवानिवृत्त हुईं। न्यायमूर्ति पाल को 28 जनवरी 2000 को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वह दो जून, 2006 को सेवानिवृत्त हुईं। न्यायमूर्ति मिश्रा ने 30 अप्रैल, 2010 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश का पद्भार ग्रहण किया था और वह 27 अप्रैल, 2014 को सेवानिवृत्त हुई थीं। न्यायमूर्ति देसाई शीर्ष अदालत की पांचवीं महिला न्यायाधीश थीं, जिन्हें 13 सितंबर, 2011 को नियुक्त किया गया था। वह अक्टूबर 2014 में सेवानिवृत्त हुईं।वर्ष 1988 में प्रत्यक्ष भर्ती के रूप में तमिलनाडु उच्च न्यायिक सेवा में प्रवेश करने वाली न्यायमूर्ति भानुमति को 13 अगस्त 2014 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। पांच साल से अधिक के कार्यकाल के बाद, वह पिछले साल 19 जुलाई को सेवानिवृत्त हुईं। न्यायमूर्ति मल्होत्रा, जो बार से सीधे पीठ में पदोन्नत होने से पहले एक वरिष्ठ अधिवक्ता थी, को 27 अप्रैल, 2018 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। वह इस साल 13 मार्च को सेवानिवृत्त हुईं। न्यायमूर्ति बनर्जी, मंगलवार को न्यायमूर्ति कोहली, नागरत्ना और त्रिवेदी के शपथ ग्रहण से पहले शीर्ष अदालत में अकेली महिला न्यायाधीश थीं। न्यायमूर्ति बनर्जी को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया और बाद में उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उन्हें सात अगस्त, 2018 को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और वह सितंबर 2022 में सेवानिवृत्त होंगी। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण ने मंगलवार को कुल नौ नए न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में पद की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति कोहली, न्यायमूर्ति नागरत्ना और न्यायमूर्ति त्रिवेदी के अलावा जिन न्यायाधीशों ने शपथ ली हैं उनमें न्यायमूर्ति अभय श्रीनिवास ओका, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार माहेश्वरी, न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा शामिल हैं। नौ नए न्यायाधीशों के शपथ लेने के साथ ही उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर अब 33 हो गई है। उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों के स्वीकृत पदों की संख्या 34 है।

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