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लंदन में बोले राहुल- RSS की सोच अरब देशों की मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी, पाक को लेकर PM मोदी की नीतियों में कमी

By भारती द्विवेदी | Updated: August 24, 2018 17:08 IST

राहुल ने अपनी बात रखते हुए कहा है कि 1.3 अरब लोगों के बीच भेदभाव पैदा करने से भारत की ताकत कम हो जाएगी।

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नई दिल्ली, 24 अगस्त: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों विदेश दौरे पर हैं। लंदन में थिंक टैंक इंटरनेशनल  इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटिजक स्टडीड में लोगों को संबोधित करते हुए राहुल ने मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना की है। राहुल गांधी ने कहा है- 'मोदी सरकार पर मैं ये कहना चाहूंगा कि पाकिस्तान के साथ भी उनकी रणनीति में कमी है। पीएम मोदी के पास कोई गहराई से सोची-समझी रणनीति नहीं है।'

कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक (आरएसएस) के बारे में बोलते हुए कहा- 'आरएसएस भारत की प्रकृति को बदलने की कोशिश कर रहा है। अन्य पार्टियों ने भारत की संस्थाओं पर कब्जा करने के लिए कभी हमला नहीं किया। आरएसएस की सोच अरब देशों की मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी है।'

भारत-चीन के बीच डोकलाम को लेकर चल रहे विवाद पर उन्होंने कहा- 'डोकलाम कोई अलग मुद्दा नहीं है। ये एक के बाद एक कई घटनाओं का हिस्सा था, यह एक प्रक्रिया थी। प्रधानमंत्री जी डोकलाम को महज एक घटना के रूप में देखते हैं। अगर उन्होंने ध्यान से पूरी प्रक्रिया को देखा होता तो वो इसे रोक सकते थे। सच्चाई ये है कि चीनी आज भी डोकलाम में मौजूद हैं।'

राहुल गांधी ने चीन के सरकार की नीतियों की तारीफ करते हुे कहा है- 'चीन से हम एक चीज ये सीख सकते हैं कि स्थानीय सरकारें प्रणाली को कैसे चलाती हैं। भारत में प्रधानमंत्री कार्यालय काफी ताकतवर है।' उन्होंने नोटबंदी पर बात करते हुए मोदी सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। राहुल का कहना है कि 'नोटबंदी का विचार वित्त मंत्री और आरबीआई को नज़रंदाज़ करके, सीधे आरएसएस से आया और प्रधानमंत्री के दिमाग में बैठा दिया गया।' 

मोदी सरकार से अपनी शिकायतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा- 'भारत में मौजूदा सरकार के बारे में मेरी मुख्य शिकायतों में से एक ये है कि मुझे भारत की ताकत के आधार पर कोई सुसंगत रणनीति नहीं दिख रही है। मुझे केवल तात्कालिक प्रतिक्रियाएं दिखती हैं।'

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर तंज कसते हुए राहुल ने कहा है कि विदेश मंत्रालय का एकाधिकार मिटाकर और समाज के अन्य अंगों के लिए इसे और अधिक सुलभ बनाकर एक आधुनिक विदेश मंत्रालय बनाया जा सकता है। भारत की विदेश मंत्री वीजा बनाने में ही काफी समय बिताती हैं।

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