सवाल पूछने के अवसर और तरीके को लेकर गंभीर सवाल

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: May 20, 2026 07:49 IST2026-05-20T07:49:37+5:302026-05-20T07:49:45+5:30

अभी भी गोरी चमड़ी का दंभ दिखाने की प्रवृति यूरोप से गई नहीं है. यूरोप को समझ लेना चाहिए कि भारत को देखने का नजरिया उन्हें बदलना पड़ेगा.

Serious questions about the opportunity and manner of asking questions | सवाल पूछने के अवसर और तरीके को लेकर गंभीर सवाल

सवाल पूछने के अवसर और तरीके को लेकर गंभीर सवाल

सोशल मीडिया पर इस समय नार्वे की पत्रकार हेल्ले लिंग बहुत छाई हुई हैं. दरअसल भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नार्वे के प्रधानमंत्री जोनस गेहर की प्रेस ब्रीफिंग थी. अमूमन राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्री समझौतों के बारे में जानकारी देते हैं. ऐसे आयोजन में आमतौर पर सवाल-जवाब नहीं होते हैं. दोनों ही प्रधानमंत्री पत्रकारों को संबोधित करते हैं और ब्रीफिंग समाप्त हो जाती है. ओस्लो में ऐसी ही प्रेस ब्रीफिंग के बाद जब प्रधानमंत्री वहां से निकल रहे थे तब डाग्सएविसन नाम के एक समाचार पत्र की पत्रकार हेल्ले लिंग ने आवाज लगाई कि प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों को क्यों नहीं लेते? उनका आशय यही था कि नार्वे प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में नंबर वन है, तो वहां के पत्रकारों के सवालों के जवाब आप क्यों नहीं दे रहे हैं?

वे नार्वे के पत्रकारों को दुनिया का सबसे स्वतंत्र बताने की कोशिश कर रही हैं. इससे किसी को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए मगर क्या हेल्ले लिंग को  यह पता नहीं था कि ये ब्रीफिंग है और दोनों ही प्रधानमंयिों ने कोई भी सवाल नहीं लिया है. वे यही सवाल अपने प्रधानमंत्री से भी पूछ सकती थीं. मगर उनका इरादा निश्चित रूप से नरेंद्र मोदी से सवाल पूछ कर सुर्खियों में आना था. अपने सवाल को लेकर उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर दो पोस्ट किए.

मगर आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि इसके पहले हेल्ले ने एक्स पर कोई सामग्री कब पोस्ट की थी! जी हां दो साल से भी ज्यादा पहले अप्रैल 2024 में उन्होंने युवाओं में नशे की लत को लेकर एक आर्टिकल पोस्ट किया था. यानी अपने सोशल मीडिया हैंडल का खयाल उन्हे नरेंद्र मोदी को लेकर अपने लक्ष्य को साधने के लिए आया! लगता तो यही है क्योंकि उनके अखबार डाग्सएविसन की पंद्रह हजार प्रतियां भी नहीं बिकतीं और पचास हजार फॉलोवर भी नहीं हैं. हेल्ले को पता होना चाहिए कि हमारे यहां तो सामान्य यूट्यूबर्स भी लाख दो लाख फॉलोअर्स बना लेते हैं.

स्थिति साफ है कि हेल्ले लिंग या तो खुद सुर्खियां बटोरने के लिए  एक ऐसे मंच से सवाल पूछने पहुंची जहां सवाल जवाब होने ही नहीं थे या फिर किसी ने उन्हें इसके लिए प्रेरित किया था. उन्हें प्रेरित करने को लेकर सवाल पूछे जाने लगे हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर बार-बार कहना पड़ रहा है कि वे किसी देश की जासूस नहीं हैं. सवाल यह है कि यदि वे पाक साफ हैं तो उन्हें सफाई देने की जरूरत क्या है? हम जानते हैं कि यूरोपीय देशों को अभी भी हम भारतीय कमतर नजर आते हैं.

उन्हें यह नहीं सुहाता कि विश्व अर्थव्यवस्था में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. वे यह बात पचा नहीं पाते कि हमने यूरोप को बहुत पीछे छोड़ दिया है. अभी भी गोरी चमड़ी का दंभ दिखाने की प्रवृति यूरोप से गई नहीं है. यूरोप को समझ लेना चाहिए कि भारत को देखने का नजरिया उन्हें बदलना पड़ेगा. और ये जो फ्रीडम ऑफ प्रेस की आजादी की जो सूची बनाई जाती है, वह बनाता कौन है?

क्या हम भारतीयों से कभी पूछा कि हमारी क्या राय है. ये रिपोर्ट जब कहती है कि फ्रीडम ऑफ प्रेस के मामले में पाकिस्तान की स्थिति भारत से बेहतर है तो सूची बनाने वाली की दिमागी हालत पर तरस खाने को जी चाहता है. हेल्ले लिंग भी ऐसी ही मानसिकता की शिकार हैं. और ऐसी मानसिकता वालों की हम परवाह नहीं करते! हमारे यहां एक कहावत है- हाथी चले बाजार...भूंके हजार!

Web Title: Serious questions about the opportunity and manner of asking questions

विश्व से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे