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अन्य पोस्टरों में नेहरू की तस्वीर होगी, मुद्दे पर विवाद गैर जरूरी : आईसीएचआर अधिकारी

By भाषा | Updated: August 29, 2021 16:29 IST

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भारत की स्वतंत्रता के 75वें साल के जश्न के लिए जारी पोस्टरों में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर को कथित तौर पर शामिल नहीं करने को लेकर विपक्षी पार्टियों की आलोचना का सामना कर रहे भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) ने रविवार को कहा कि इस मुद्दे पर विवाद ‘गैर जरूरी’ है और आने वाले दिनों में जारी होने वाले पोस्टरों में नेहरू की तस्वीर होगी। आईसीएचआर के एक शीर्ष अधिकारी ने इस मुद्दे पर आलोचना को खारिज करते हुए कहा, ‘‘हम आजादी की लड़ाई में किसी की भूमिका को कमतर करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि जिस पोस्टर को लेकर विवाद हुआ है वह आजादी का अमृत महोत्सव जश्न के तहत जारी होने वाले कई पोस्टरों में से एक है। उल्लेखनीय है कि आईसीएचआर, शिक्षा मंत्रालय के तहत स्वायत्त संस्था है और ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ जश्न के तहत स्वतंत्रता संग्राम थीम पर व्याख्यानों और संगोष्ठियों की श्रृंखला चला रहा है। आईसीएचआर के अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ आजादी का अमृत महोत्सव जश्न के तहत यह केवल एक पोस्टर है जिसे जारी किया गया है। कई अन्य पोस्टर होंगे और उनमें नेहरू भी होंगे...इस मुद्दे पर विवाद गैरजरूरी है।’’ व्याख्यान श्रृंखला के तहत परिषद ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े अलग-अलग विषयों पर बोलने के लिए विभिन्न इतिहासकारों और शिक्षाविदों को आमंत्रित किया है। विपक्षी पार्टियों ने देश के पहले प्रधानमंत्री की तस्वीर पोस्टर में नहीं होने पर सरकार पर निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि यह जानबूझकर किया गया है। जयराम रामेश, शशि थरूर और पवन खेड़ा सहित तमाम कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर आईसीएचआर की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट साझा किया था, जिसमें महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, भीम राव आम्बेडकर, सरदार वल्लभ भाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद, मदन मोहन मालवीय और वीर सावरकर की तस्वीर दिखाई दे रही है, लेकिन नेहरू की तस्वीर गायब है। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने रविवार को आईसीएचआर की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि वह नफरत और पूर्वाग्रह के आगे झुक गई है। उन्होंने पूछा किया क्या मोटर कार के आविष्कार का जश्न मनाने के दौरान हेनरी फोर्ड को या हवाई जहाज के आविष्कार का जश्न मनाने के दौरान राइट बंधुओं को भूला जा सकता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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