ईरान युद्ध संकटः 'घर से काम करो, विदेश यात्रा नहीं करो', सोना न खरीदें?, विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला किया, कहा-हिसाब-किताब का समय आ गया?
By सतीश कुमार सिंह | Updated: May 11, 2026 13:09 IST2026-05-11T13:07:09+5:302026-05-11T13:09:04+5:30
Iran War Crisis: सोना न खरीदें, विदेश न जाएं, पेट्रोल का कम इस्तेमाल करें, खाद और खाना पकाने के तेल की खपत कम करें, मेट्रो का इस्तेमाल करें, घर से काम करें। ये उपदेश नहीं हैं, ये विफलता के प्रमाण हैं।

file photo
नई दिल्लीः मध्य पूर्व में बढ़ते संकट के बीच नागरिकों से मितव्ययिता के उपाय अपनाने की अपील करने के बाद विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। प्रतिद्वंद्वियों ने सवाल उठाया कि क्या सरकार आम जनता पर बोझ डालकर एक और गहरे आर्थिक संकट की तैयारी कर रही है। कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने केंद्र सरकार पर "नीतिगत विफलता", खराब आर्थिक योजना और पाखंड का आरोप लगाया। विदेश यात्रा से बचने, ईंधन का उपयोग कम करने, सोने की खरीद स्थगित करने और घर से काम करने की व्यवस्था को फिर से शुरू करने का आग्रह किया।
These are very serious “directives” from the @PMOIndia, what are the triggers for this? The Government must convene Parliament immediately & take the nation into confidence & inform us about the true state of affairs which has necessitated these “appeals”. https://t.co/aEw3V6Gg6H
— Karti P Chidambaram (@KartiPC) May 11, 2026
मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार के हाई अलर्ट पर आने के साथ ही राजनीतिक विरोध और भी तेज हो गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (आईजीओएम) की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी के निर्देशों को "विफलता का प्रमाण" बताया। मोदी जी ने कल जनता से त्याग की मांग की है।
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 11, 2026
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न…
सोना न खरीदें, विदेश न जाएं, पेट्रोल का कम इस्तेमाल करें, खाद और खाना पकाने के तेल की खपत कम करें, मेट्रो का इस्तेमाल करें, घर से काम करें। ये उपदेश नहीं हैं, ये विफलता के प्रमाण हैं। कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की "अप्रत्याशित अपील" का मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में मितव्ययिता से जुड़े कठोर कदम उठाए जाएं।
उपाय उनके रास्ते में आ सकते हैं क्योंकि जमीनी स्तर की आर्थिक स्थिति "सरकार के प्रचार" से पूरी तरह अलग है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस बात पर जोर दिया कि हिसाब-किताब का समय आ गया है। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "प्रधानमंत्री द्वारा कल हैदराबाद से देशवासियों से की गई अप्रत्याशित अपील के निम्नलिखित अर्थ हो सकते हैं।
आर्थिक स्थिति आधिकारिक आंकड़ों और प्रधानमंत्री तथा उनके साथियों द्वारा अब तक किए जा रहे दावों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर है।" उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि सहित सख्ती से खर्च कम करने के उपायों का दौर आने वाला हो सकता है, और उन्हें अधिक स्वीकार्य बनाने के लिए माहौल तैयार किया जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा, "यह बात लंबे समय से स्पष्ट है कि जमीन पर आर्थिक हालात-जो वास्तविक मजदूरी में ठहराव, परिवारों पर बढ़ते कर्ज और रोजगार पैदा करने वाले निजी निवेश में गति की कमी जैसी स्थितियों में दिखाई देते हैं-मोदी सरकार के प्रचार से बिल्कुल अलग हैं।" उन्होंने दावा किया कि हिसाब-किताब का समय अब आ गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध के प्रभाव और पश्चिमी एशिया में तनाव के बीच देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने रविवार को कहा कि युद्ध के कारण पेट्रोल और उर्वरक की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जब आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव होता है, तो संकट से निपटने के विभिन्न उपायों के बावजूद मुश्किलें बढ़ जाती हैं।