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महाराष्ट्र सरकार का दावा, 'सीएम एकनाथ शिंदे ने वेदांता-फॉक्सकॉन को पुणे में संयंत्र लगाने के लिए किया था आमंत्रित'

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: September 16, 2022 15:34 IST

महाराष्ट्र की जगह गुजरात में लगने वाले वेदांता-फॉक्सकॉन के सेमीकंडक्टर संयंत्र विवाद में महाराष्ट्र सरकार की ओर कहा गया है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वेदांता के प्रमुख अनिल अग्रवाल को पुणे के पास संयत्र स्थापित करने के लिए 29 जुलाई को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के लिए आमंत्रित किया था।

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ठळक मुद्देमहाराष्ट्र से गुजरात में लगने जा रहे वेदांता-फॉक्सकॉन के सेमीकंडक्टर संयंत्र पर हुआ बड़ा खुलासा महाराष्ट्र सरकार का दावा सीएम शिंदे ने 29 जुलाई को एमओयू पर साइन करने के लिए बुलाया था अनिल अग्रवाल कोसीएम शिंदे और डिप्टी सीएम फड़नवीस वेदांता प्रमुख अनिल अग्रवाल के नियमित संपर्क में थे

मुंबई: वेदांता-फॉक्सकॉन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह प्रदेश गुजरात में सेमीकंडक्टर संयंत्र लगाने पर मचे घमासान पर महाराष्ट्र की ओर कहा गया है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दोनों कंपनियों के संयुक्त संयंत्र को पुणे में लगाने के लिए आमंत्रण भेजा था।

इस संबध मे सरकार के अधिकारियों ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कंपनी को पुणे के पास संयंत्र स्थापित करने के लिए 29 जुलाई को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के लिए आमंत्रित किया था। इसके साथ ही उस अधिकारी ने इस बात का भी दावा किया कि सीएम शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस इस संबंध में वेदांता प्रमुख अनिल अग्रवाल के नियमित संपर्क में थे और उनसे लगातार फोन पर बात कर रहे थे।

अधिकारी ने कहा, "मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अनिल अग्रवाल को बाकायदा चिट्ठी लिखकर इस बात का भरोसा दिया था कि उनके द्वारा सेमीकंडक्टर संयंत्र लगाने के लिए राज्य कैबिनेट की मंजूरी के साथ केंद्र सरकार की ओर से संयंत्र लगाने के लिए 20 फीसदी पूंजीगत सब्सिडी की भी मंजूरी ले ली जाएगी।'

शीर्ष अधिकारी ने कहा, "अनिल अग्रवाल की वेदांत टीम ने इस मामले में बीते 26 जुलाई को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ-साथ सूबे के अधिकारियों के साथ लंबी बैठक की थी। जिसके बाद सीएम शिंदे ने 26 जुलाई को ही अनिल अग्रवाल को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने 29 जुलाई को अग्रवाल को  समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के लिए आमंत्रित किया था।"

मुख्यमंत्री शिंदे ने अनिल अग्रवाल को लिखे पत्र में स्पष्ट कहा था कि महाराष्ट्र सरकार केंद्र सरकार से पुणे के पास संयंत्र लगाने के लिए उच्चत स्तरीय छूट देने की मांग की गई है ताकि इस परियोजना को ज्यादा से ज्यादा सहूलियत मिल पाए। अधिकारी के मुताबिक राज्य सरकार ने वेदांता को संयंत्र लगाने के लिए सब्सिडी पर जमीन, पानी की सप्लाई, स्टांप ड्यूटी में छूट समेत कई अन्य तरह की सुविधाएं देने की पेशकश की थी।

मालूम हो कि वेदांता-फॉक्सकॉन ने 1.54 लाख करोड़ रुपये की लगात से लगना वाले सेमीकंडक्टर संयंत्र को स्थापित करने के लिए महाराष्ट्र की जगह गुजरात को चुना है। जिस कारण महाराष्ट्र में भयंकर सियासी तूफान मचा है। भारतीय कंपनी वेदांत ने ताइवान की इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज फॉक्सकॉन के साथ मिलकर गुजरात में संयंत्र स्थापित करने के लिए एक संयुक्त उद्यम बनाने का फैसला किया है।

दोनों कंपनियों की ओर से इस इकाई को पहले महाराष्ट्र में पुणे के पास स्थित तालेगांव में लगाने की घोषणा की गई थी। लेकिन जैसे ही ऐलान हुआ कि यह संयंत्र महाराष्ट्र के बदले गुजरात में लगाया जाएगा, महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाते हुए एकनाथ शिंदे सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

विपक्षी दल शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस ने संयंत्र के गुजरात जाने की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस की सरकार को घेरने हुए आरोप लगाया है कि पहले यह संयंत्र पुणे में लगने वाला था लेकिन महाराष्ट्र के अक्षम नेतृत्व के कारण यह गुजरात में ट्रांसफर कर दिया गया।

शिवसेना ने इसके लिए सीधे तौर पर सीएम एकनाथ शिंदे को जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे पूछा है कि जब वो दावा कर रहे थे कि वेदांता का प्रोजेक्ट पुणे के पास लगेगा तो आखिर वो कौन सी परिस्थितियां बनीं कि कंपनी उसे लेकर गुजरात चल गई। सीएम शिंदे को इस मामले में जनता के बीच सफाई पेश करनी चाहिए।

वहीं राज्य सरकार का नेतृत्व कर रही एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना और भाजपा का कहना है कि इस विषय को राजनीति का मुद्दा बनाकर विपक्षी दल फिर से जिंदा होने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वो इसमें सफल नहीं हो पाएंगे। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनुपट के साथ)

टॅग्स :एकनाथ शिंदेदेवेंद्र फड़नवीसVedanta Groupगुजरातमहाराष्ट्र
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