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गुजरात के बाद अब झारखंड सरकार का ऐलान, गरीब सवर्णों को मिलेगा 10 फीसदी आरक्षण

By पल्लवी कुमारी | Updated: January 15, 2019 18:10 IST

झारखंड राज्य सरकार के मुताबिक 15 जनवरी 2019 के बाद ये यह नियम लागू किया जाएगा। 10 फीसदी आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले 50 फीसदी आरक्षण के अतिरिक्त होगा।

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झारखंड सरकार ने गरीब सर्वणों को सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में र्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण व्यवस्था को लागू करने के फैसले का ऐलान कर दिया है। इससे पहले ऐसा गुजरात में किया गया था। 

राज्य सरकार के मुताबिक 15 जनवरी 2019 के बाद ये यह नियम लागू किया जाएगा। बता दें कि 10 फीसदी आरक्षण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले 50 फीसदी आरक्षण के अतिरिक्त होगा। सरकारी विज्ञप्ति में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अनारक्षित वर्ग के आर्थिक रुप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने के ऐतिहासिक निर्णय के आलोक में प्रदेश सरकार ने भी राज्य के शिक्षण संस्थानों एवं सरकारी नौकरियों में इसका लाभ देने का निर्णय किया गया है । मुख्यमंत्री के हवाले से इसमें कहा कि राज्य सरकार की नौकरियों, शैक्षणिक संस्थानों जिन में बहाली एवं नामांकन की प्रक्रिया 15 जनवरी, 2019 के पश्चात’ प्रारंभ होगी, उन सभी मामलों में ’अनारक्षित वर्ग के आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला आज राज्य सरकार ने किया है। 

बतादें कि सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सरकारी नौकरियों तथा शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का संवैधानिक प्रावधान सोमवार से प्रभाव में आ गया है। इस बाबत सरकारी अधिसूचना जारी कर दी गई थी। संविधान (103 संशोधन) अधिनियम, 2019 को शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिल गयी थी।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की राज पत्रित अधिसूचना के अनुसार, ‘‘संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार 14 जनवरी को उस तारीख के रूप में चिहि्नत करती है जिस दिन कथित कानून के प्रावधान प्रभाव में आएंगे।’’

अधिनियम में संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 का संशोधन किया गया है और एक उपबंध जोड़ा गया है जो राज्यों को ‘‘आर्थिक रूप से कमजोर किसी भी वर्ग के नागरिकों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान’’ बनाने का अधिकार देता है।

‘विशेष प्रावधान’ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को छोड़कर अन्य निजी संस्थानों समेत शिक्षण संस्थानों में प्रवेश से जुड़ा है। इनमें सरकारी सहायता प्राप्त और गैर सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान शामिल हैं।

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