शिविर में कुल 67 शिकायत, 30 दिन में करें समाधान नहीं तो 31वें दिन निलंबित?, रेफर नीति अपनाई तो सिविल सर्जन और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई?, सम्राट चौधरी ने दी चेतावनी
By एस पी सिन्हा | Updated: May 19, 2026 15:15 IST2026-05-19T15:14:01+5:302026-05-19T15:15:01+5:30
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया कि जनता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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पटनाः बिहार में जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मंगलवार से ‘सहयोग शिविर’ अभियान की शुरुआत हो गई. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सारण जिले के सोनपुर प्रखंड के डुमरी बुजुर्ग पंचायत में पहला सहयोग शिविर लगाकर लोगों की शिकायतें सुनीं. शिविर में कुल 67 शिकायतें सामने आईं, जिनके समाधान का दावा मुख्यमंत्री ने मौके पर ही किया. इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और विकास योजनाओं को लेकर बड़ा और सख्त संदेश दिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया कि जनता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अधिकारियों और डॉक्टरों को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि अनुमंडल अस्पतालों के डॉक्टर अब सामान्य बीमारी में मरीजों को बड़े अस्पतालों, खासकर पटना रेफर नहीं कर पाएंगे. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि बिना गंभीर कारण किसी मरीज को पटना रेफर किया गया तो संबंधित सिविल सर्जन और डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
सरकार का उद्देश्य जिला और अनुमंडल स्तर पर ही बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े. सम्राट चौधरी ने दावा किया कि 15 अगस्त तक राज्य के सभी जिला और अनुमंडल अस्पतालों में इलाज की बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित कर दी जाएंगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनता के भरोसे बनी है और लोगों की समस्याओं का समाधान करना उसकी पहली जिम्मेदारी है. उन्होंने अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि सहयोग शिविर में मिली शिकायतों का निपटारा 30 दिनों के भीतर हर हाल में करना होगा. ऐसा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी को 31वें दिन निलंबित कर दिया जाएगा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि अब हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सभी मंत्री अपने-अपने जिलों में सहयोग शिविर लगाएंगे.
इसका मकसद पंचायत स्तर पर ही लोगों की समस्याओं का समाधान करना है ताकि आम जनता को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक गांवों और पंचायतों में जाकर जनता की समस्याएं सुन रहे हैं. सरकार चाहती है कि लोगों को योजनाओं का सीधा लाभ मिले और शिकायतों का त्वरित निपटारा हो.