लाइव न्यूज़ :

दादा के शव पर बैठा तीन साल का पोता पूछता है कहां है मानवाधिकार!

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: July 1, 2020 15:59 IST

आतंकियों ने सीआरपीएफ के जवानों पर हमला किया। इस दौरान एक नागरिक की भी जान चली गई। मृतक के शव पर बैठे तीन साल के पोते की दर्दनाक तस्वीर सबको विचलित कर रही हैं। दरअसल सोपोर में हुए आतंकी हमले में केरिपुब का एक जवान शहीद हो गया।

Open in App
ठळक मुद्देनागरिक अपने तीन साल के पोते (बेटे का बेटा) संग घर से दूध खरीदने निकला था। लेकिन उसे क्या पता था कि ऐसी घटना हो जाएगी।नागरिक की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद उसका तीन साल का मासूम पोता ये भी न जान पाया कि दादा की मौत हो गई है।काफी देर तक वह अपने बाबा के शव के ऊपर बैठा रहा। उसकी मासूमियत ने हर इंसान को रुला दिया।

जम्मूः सच में यह हृदयविदारक दृश्य है जब एक पोता दादा के शव पर बैठ कर अपने दादा की मौत का मातम मना रहा हो और मानवाधिकार के नाम पर चिल्लाने वाले कहीं नजर न आते हों।

कश्मीर में आतंकियों और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ की खबरें आम बात है। हर दिन सुरक्षाबल आतंकियों को अपनी गोली का निशाना बनाते रहते हैं। हाल के दिनों में घाटी में आतंकियों को बड़ी संख्या में मारा गया है। इसके बावजूद आतंकवादी अपने नापाक मंसूबों से पीछे नहीं हट रहे हैं।

बुधवार सुबह आतंकियों ने सीआरपीएफ के जवानों पर हमला किया। इस दौरान एक नागरिक की भी जान चली गई। मृतक के शव पर बैठे तीन साल के पोते की दर्दनाक तस्वीर सबको विचलित कर रही हैं। दरअसल सोपोर में हुए आतंकी हमले में केरिपुब का एक जवान शहीद हो गया।

इसके साथ ही आतंकियों ने एक नागरिक को भी गोली मार दी, जिसकी मौके पर मौत हो गई। उक्त नागरिक अपने तीन साल के पोते (बेटे का बेटा) संग घर से दूध खरीदने निकला था। लेकिन उसे क्या पता था कि ऐसी घटना हो जाएगी।

गोली लगने के बाद उक्त नागरिक की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद उसका तीन साल का मासूम पोता ये भी न जान पाया कि दादा की मौत हो गई है। काफी देर तक वह अपने बाबा के शव के ऊपर बैठा रहा। उसकी मासूमियत ने हर इंसान को रुला दिया।

मृतक नागरिक 60 साल के बुजुर्ग थे। घटनास्थल से इनकी तस्वीर सामने आई हैं। जमीन पर शव पड़ा हुआ है, कपड़े खून से सने हैं और वहीं मृत शख्स का 3 साल का पोता भी मौजूद है। ये मासूम अपने दादा की लाश पर इस तरह बैठा हुआ है, जैसे शायद कभी वो उनकी गोद में खेलता होगा। लेकिन दादा का शरीर गोलियों से छलनी था और उनके कपड़े खून से सने थे।

वो अपने पोते को अब गोद में नहीं उठा सकते थे। ऐसे में वहां मौजूद पुलिस टीम के एक सदस्य ने बच्चे को अपनी गोद में उठाया और आतंकियों के साथ चल रहे एनकाउंटर साइट से अलग किया। इससे पहले एक तस्वीर में ये बच्चा शव के पास ही मौजूद एक जवान की तरफ जाता दिखाई दे रहा है। आतंकियों के खिलाफ पोजिशन लिए हुए यह जवान बच्चे को दूसरी तरफ जाने का इशारा करता दिखाई दे रहा है।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरआतंकवादीआतंकी हमलाभारतीय सेनाह्यूमन राइट्स
Open in App

संबंधित खबरें

भारतजमानत नियम और जेल अपवाद, यूएपीए मामले में भी यही नियम?, सुप्रीम कोर्ट ने हंदवाड़ा निवासी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को दी राहत, पासपोर्ट जमा करने और हर 15 दिन में एक बार थाने जाओ?

भारतसुंबली मावस उत्सव: घाटी में गूंजी पुरानी आवाजें, 37 साल बाद कश्मीरी पंडितों ने अपनी मिट्टी को चूमा

क्राइम अलर्टजम्मू-कश्मीर: अपहरण के मामलों में 50% की कमी, लेकिन शून्य पर पहुंचना अभी बाकी

भारतचौंकाने वाला आंकड़ा: कश्मीर में कुत्तों से आगे निकलीं बिल्लियां, 85,000 से ज़्यादा लोग हुए शिकार

भारत'पाकिस्तान को तय करना होगा भूगोल में रहना है या इतिहास बनना है' सेना प्रमुख

भारत अधिक खबरें

भारतईमानदारी के अभाव में शातिर बन जाती है समझदारी

भारत"सरकार हर आयोजन को सड़क पर करा रही है": सड़कों पर नमाज को लेकर सीएम योगी पर अखिलेश का पलटवार

भारतUjjain: श्री महाकाल मंदिर सभा मंडप में सफाई कर्मी महिला को कुत्ते ने काटा

भारत'चंद दिनों के बलात्कार और दुष्कर्म के चंद आंकड़े दे रहा हूँ': नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आंकड़े जारी कर सम्राट सरकार पर बोला तीखा हमला

भारतविकास प्रक्र‍िया में जनजातीय समाज को शामिल करने प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बनाई नीतियां: मंत्री डॉ. शाह