लाइव न्यूज़ :

Same Sex Marriage: समलैंगिक जोड़े सामाजिक लाभ कैसे उठा सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से किया सवाल

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 27, 2023 18:36 IST

सरकार समान-लिंग वाले जोड़ों को वैवाहिक स्थिति प्रदान किए बिना उपरोक्त में से कुछ मुद्दों को कैसे संबोधित कर सकती है, इस सवाल को लेकर अदालत ने सॉलिसिटर जनरल को बुधवार को जवाब देने के लिए कहा है।

Open in App
ठळक मुद्देकोर्ट ने कहा, सरकार को समलैंगिक जोड़ों को संयुक्त बैंक खाते खोलने या बीमा पॉलिसियों में भागीदार नामित करने जैसे बुनियादी सामाजिक अधिकार देने का एक तरीका खोजना चाहिएअदालत ने सॉलिसिटर जनरल को बुधवार को इस पर जवाब देने के लिए कहा हैSC की पांच-न्यायाधीशों की पीठ पिछले सप्ताह से इस मामले में दलीलें सुन रही है

नई दिल्ली: समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र से पूछा कि समलैंगिक जोड़े सामाजिक लाभ कैसे उठा सकते हैं? कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र से कहा कि सरकार को समलैंगिक जोड़ों को संयुक्त बैंक खाते खोलने या बीमा पॉलिसियों में भागीदार नामित करने जैसे बुनियादी सामाजिक अधिकार देने का एक तरीका खोजना चाहिए, क्योंकि ऐसा लगता है कि समलैंगिक विवाह को वैध बनाना संसद का विशेषाधिकार है।

समलैंगिक विवाह की कानूनी मान्यता और संरक्षण की मांग कर रहे याचिकाकर्ताओं ने देश की शीर्ष अदालत ने तर्क दिया कि उन्हें शादी करने के अधिकार से वंचित करना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और परिणामस्वरूप भेदभाव और बहिष्कार हुआ है। सरकार समान-लिंग वाले जोड़ों को वैवाहिक स्थिति प्रदान किए बिना उपरोक्त में से कुछ मुद्दों को कैसे संबोधित कर सकती है, इस सवाल को लेकर अदालत ने सॉलिसिटर जनरल को बुधवार को जवाब देने के लिए कहा है।

सीजेआई डी वाई चंद्रचूर्ण ने कहा, "हम आपकी बात मानते हैं कि अगर हम इस क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, तो यह विधायिका का क्षेत्र होगा। तो, अब क्या? सरकार 'सहवास' संबंधों के साथ क्या करना चाहती है? और सुरक्षा और सामाजिक कल्याण की भावना कैसे बनाई जाती है और यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसे संबंध बहिष्कृत न हों?"

कोर्ट की यह टिप्पणी केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर अदालत नहीं, बल्कि संसद में संसद को बहस करनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस मामले को "सरकार बनाम न्यायपालिका" का मुद्दा नहीं बनाना चाहते हैं। गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की पीठ पिछले सप्ताह से इस मामले में दलीलें सुन रही है।

टॅग्स :सेम सेक्स मैरेजDY Chandrachudकिरेन रिजिजूKiren Rijiju
Open in App

संबंधित खबरें

भारतकेंद्र सरकार ने कहा- लद्दाख की पूर्ण राज्य और छठी अनुसूची की मांग पर विचार नहीं होगा

भारतलोकसभा: 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रस्ताव किया पेश

कारोबारईरान से 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर दो जहाज़ 17 मार्च तक पहुंचेंगे भारत, केंद्र ने दी राहतभरी जानकारी

भारतसंसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू से मुलाकात और 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन को रद्द करने की मांग,  लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह

कारोबारआज एलपीजी का प्रोडक्शन 10% बढ़ा, सरकार ने कमी की चिंताओं को किया खारिज

भारत अधिक खबरें

भारतअल्केमिस्ट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड केस से अलग हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन, आखिर कारण

भारतLPG Cylinder Update: सिलेंडर के लिए अब लंबी वेटिंग खत्म! दिल्ली में बस ID कार्ड दिखाओ और 5KG सिलेंडर पाओ

भारतबाबा विश्वनाथ और ‘काशी कोतवाल’ काल भैरव में दर्शन-पूजन, सीएम योगी आदित्यनाथ पहुंचे मंदिर, वीडियो

भारतपश्चिम बंगाल चुनावः 4660 अतिरिक्त मतदान केंद्र?, कुल संख्या 85379 और 23 और 29 अप्रैल को 2 चरणों में पड़ेंगे वोट

भारतTamil Nadu Election 2026: क्या CBSE का नया सिलेबस भाषा विवाद की जड़? सीएम स्टालिन ने कहा- "भाषा थोपने का सुनियोजित प्रयास"