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परिसीमन आयोग के अधिकारी ने जम्मू कश्मीर विस क्षेत्रों के पुनर्गठन पर उपायुक्तों के साथ चर्चा की

By भाषा | Updated: June 23, 2021 21:51 IST

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नयी दिल्ली, 23 जून परिसीमन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को जम्मू कश्मीर के सभी उपायुक्तों के साथ मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन और सात नयी सीटें बनाने पर विचार-विमर्श किया।

सूत्रों ने बताया कि सभी 20 उपाययुक्तों ने एक आनलाइन बैठक में भाग लिया, जिसमें विधानसभा सीटों को भौगोलिक रूप से अधिक सुगठित बनाने के तरीके के बारे में जानकारी एकत्र की गई।

सूत्रों ने बताया कि परिसीमन प्रक्रिया के तहत जम्मू कश्मीर में कुछ विधानसभा सीटों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया जाना है।

परिसीमन की कवायद के बाद जम्मू कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो जाएगी।

विधानसभा की चौबीस सीटें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पड़ने के कारण खाली रहती हैं।

परिसीमन आयोग ने हाल ही में मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के संबंध में भूगोल और उपलब्ध सुविधाओं सहित अन्य जानकारी मांगी थी और उन्हें ‘‘भौगोलिक रूप से सु्गठित’’ बनाने के लिए उपायुक्तों से उनके सुझाव मांगे थे।

आंकड़े और सुझाव प्राप्त करने के बाद, परिसीमन आयोग ने मामले को आगे बढ़ाने के लिए उपायुक्तों के साथ आनलाइन बैठक करने का निर्णय लिया।

जम्मू कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रियाओं को तेज करने के केंद्र के प्रयासों के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बृहस्पतिवार को जम्मू कश्मीर के राजनीतिक नेताओं के एक चुनिंदा समूह के साथ बैठक की अध्यक्षता करने वाले हैं, जिससे वहां विधानसभा चुनाव कराने की रूपरेखा तय होने की उम्मीद है।

जम्मू कश्मीर नवंबर 2018 से केंद्र के शासन में है और 5 अगस्त, 2019 को केंद्र ने इसके विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया था और इसे जम्मू कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था।

परिसीमन आयोग ने उपायुक्तों से पूछा था कि क्या कोई निर्वाचन क्षेत्र एक जिले में है या दो में फैला है। उनसे तहसीलों का विवरण भी पूछा गया।

पिछले साल मार्च में गठित परिसीमन आयोग को जम्मू कश्मीर के निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है जो वर्तमान में केंद्रीय शासन के अधीन है।

इस साल न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आर देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग को अपना काम पूरा करने के लिए एक साल का विस्तार दिया गया था।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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