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बिहार में कोरोना के चलते पंचायतों चुनाव पर संकट, अब अध्यादेश लाने की तैयारी में जुटी सरकार

By एस पी सिन्हा | Updated: May 6, 2021 16:51 IST

पंचायत चुनाव: कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब टल सकते हैं. 15 जून को आम चुनाव का कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में इससे पहले प्रशासन के लिए चुनाव कराना अब संभव नहीं लग रहा है.

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ठळक मुद्देआम पंचायत चुनाव का कार्यकाल 15 जून को हो रहा है पूराकोरोना के कारण अब समय से पहले पंचाय चुनाव कराना बड़ी चुनौतीऐसे में सरकार अध्यादेश ला सकती है, इसके बाद चुनाव होने तक पंचायत का कामकाज अधिकारियों के हवाले रहेगा

पटना: बिहार में जारी कोरोना के कहर के चलते त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब टलता नजर आ रहा है. 2016 में हुए आम पंचायत चुनाव का कार्यकाल 15 जून को पूरा हो रहा है. हालांकि कोरोना महामारी को देखते हए पंचायती राज विभाग अध्यादेश लाने की तैयारी में जुट गया है. 

ऐसे में पंचायतों का कामकाज 15 जून के बाद जनप्रतिनिधियों के बजाए पूरी तरह अधिकारियों के हवाले होगा. वार्ड से लेकर ग्राम पंचायत, पंचायती समिति और जिला परिषद तक की विकास योजनाएं बनाने और मंजूर करने का अधिकार प्रखंड से लेकर जिलों के अधिकारियों को देने की तैयारी की जा रही है.

बताया जाता है कि विकास योजनाओं की तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति का अधिकार बीडीओ, डीडीसी और डीएम को सौंपने का मसौदा पंचायती राज विभाग तैयार कर रहा है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा. 

जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल समाप्त होते ही त्रिस्तरीय पंचायतों के संचालन का कार्य अधिकारियों को सौंप दिया जायेगा. कोरोना के जारी कहर को देखते हुए त्रिस्तरीय पंचायतों में चुनाव कराने के प्रस्ताव को राज्य निर्वाचन आयोग ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है. 

पहले तो ईवीएम विवाद और फिर रही सही कसर को कोरोना ने पूरी कर दी है. चुनाव पर विचार करने के लिए आयोग ने 21 अप्रैल को 15 दिनों का समय लिया था. आयोग को उम्मीद थी कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम हो जाएगी, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद कोरोना की रफ्तार कम होने के बदले बढती जा रही है. 

पंचायत चुनाव नहीं होने पर सरकार को लाना होगा अध्यदेश

यह लगभग तय है कि जून के पहले सप्ताह में मानसून के प्रवेश के कारण आयोग के लिए चुनाव करना संभव नहीं होगा. ऐसे में सरकार के पास एक मात्र विकल्प पंचायती राज कानून 2006 में संशोधन ही शेष है. 

ऐसे में जानकारों का कहना है कि 2006 में पंचायती राज अधिनियम बनाने के दौरान विशेषज्ञों को अहसास भी नहीं था कि कभी चुनाव टालने की नौबत आएगी. पंचायती राज संस्थाओं के अधिकार दिए जाने के बारे में अधिनियम में कोई उल्लेख नहीं है. लिहाजा वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए सरकार को अध्यादेश लाना होगा. 

हालांकि विचार इसपर भी किया जा सकता है कि पंचायती संस्थाओं के कार्यकाल का विस्तार किया जाए. चुनाव को लेकर पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी का कहना है कि चुनाव कब होंगे, इसका फैसला आयोग करेगा. राज्य सरकार फंड और अन्य इंतजाम करती है. सरकार वह काम कर चुकी है, लेकिन आज की तारीख में चुनाव कराना संभव नहीं लग रहा है.

टॅग्स :पंचायत चुनावबिहारकोरोना वायरस
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