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CAA प्रोटेस्ट में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान व उकसाना: UP में भरपाई के लिए 66 लोगों को नोटिस, 50-50 लाख बॉन्ड भरने का आदेश

By धीरज पाल | Updated: February 13, 2020 12:06 IST

मुजफ्फरनगर में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली एक समिति ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पिछले महीने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के सिलसिले में 53 लोगों को दोषी ठहराया। 

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ठळक मुद्देसंभल प्रशासन ने इन सभी 13 आरोपियों पर सीएए के खिलाफ महिलाओं को धरने पर बैठने के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। संभल के एसडीएम राजेश कुमार ने कि हमें खुफिया जानकारी मिली थी कि आरोपी महिलाओं को शहर में धरने के लिए भड़का रहे थे।

नागरिकता कानून संशोधन (CAA) के खिलाफ महिलाओं को धरने के लिए उकसाने पर यूपी के संभल जिले के एसडीएम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 लोगों को नोटिस भेजा है। नोटिस में इन प्रत्येक लोगों पर 50-50 लाख रुपये का निजी मुचलका (बॉन्ड) भरने का भी आदेश दिया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक संभल प्रशासन ने इन सभी 13 आरोपियों पर सीएए के खिलाफ महिलाओं को धरने पर बैठने के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। यह विरोध प्रदर्शन संभल जिले के नखास इलाके में आयोजित हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक संभल के एसडीएम राजेश कुमार ने कि हमें खुफिया जानकारी मिली थी कि आरोपी महिलाओं को शहर में धरने के लिए भड़का रहे थे। हालांकि यह पहला मामला नहीं है जब यूपी प्रशासन ने ऐसा कुछ कि हो।

मुजफ्फरनगर में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली एक समिति ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पिछले महीने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के सिलसिले में 53 लोगों को दोषी ठहराया। 

समिति ने इन लोगों से 23 लाख रुपये से अधिक वसूलने का आदेश दिया। एडीएम अमित सिंह ने 20 दिसम्बर को प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए दोषियों से 23,41,290 रुपये वसूलने के राजस्व विभाग को निर्देश दिये। 

समिति ने 57 लोगों को नोटिस जारी किये थे और इस नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के वास्ते पुलिस और सरकारी विभागों से एक रिपोर्ट मांगी थी। जांच के दौरान समिति ने चार लोगों के खिलाफ नोटिस वापस ले लिये थे।

समिति ने 53 लोगों की तरफ से दाखिल आपत्तियों को खारिज कर दिया और उन्हें सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का जिम्मेदार ठहराया। 

टॅग्स :नागरिकता संशोधन कानूनउत्तर प्रदेशमुजफ्फरपुर
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