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देश में 6-23 महीने के 89 फीसदी बच्चों को नहीं मिलता पर्याप्त आहार, यूपी और गुजरात में सबसे खराब स्थिति

By विशाल कुमार | Updated: May 11, 2022 08:29 IST

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में पाया गया कि 6-23 महीने के बीच के स्तनपान करने वाले 88.9 फीसदी बच्चों को 2019-2020 में पर्याप्त आहार नहीं मिला जिसमें 2015-16 की तुलना में थोड़ा सुधार हुआ है जब यह आंकड़ा 91.3 फीसदी था।

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ठळक मुद्दे न्यूनतम स्वीकार्य आहार पाने के मामले में सबसे अच्छी स्थिति मेघालय की है। न्यूनतम स्वीकार्य आहार पाने के मामले में सबसे खराब स्थिति यूपी और गुजरात की रही है।

नई दिल्ली: हाल ही में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस -5) में पाया गया है कि 6-23 महीने की प्रारंभिक आयु के बीच के 89 फीसदी बच्चों को न्यूनतम स्वीकार्य आहार नहीं मिलता है। यह एनएफएचएस-4 में दर्ज 90.4 फीसदी से कुछ हद तक बेहतर है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एनएफएचएस रिपोर्ट में दो साल की उम्र तक स्तनपान करने वाले और स्तनपान न करने वाले बच्चों के लिए पर्याप्त आहार पर ध्यान दिया गया।

इसमें पाया गया कि 6-23 महीने के बीच के स्तनपान करने वाले 88.9 फीसदी बच्चों को 2019-2020 में पर्याप्त आहार नहीं मिला जिसमें 2015-16 की तुलना में थोड़ा सुधार हुआ है जब यह आंकड़ा 91.3 फीसदी था।

इस श्रेणी के 87.3 प्रतिशत गैर-स्तनपान कराने वाले बच्चों को 2019-21 में पर्याप्त पोषण नहीं मिला, जो 2015-16 में 85.7 प्रतिशत था। न्यूनतम स्वीकार्य आहार पाने के मामले में सबसे अच्छी स्थिति मेघालय और सबसे खराब स्थिति यूपी और गुजरात की रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अनाज और बाजरा, दालें, दूध और दूध उत्पाद, कंदमूल, हरी पत्तेदार सब्जियां, अन्य सब्जियां, फल, वसा या तेल, मछली, अंडा और अन्य मांस और चीनी में से बच्चे को कुपोषण से बचाने के लिए 4-5 को हर दिन आवश्यक बताया है।

टॅग्स :भारतWHO
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