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बॉम्बे हाईकोर्ट ने 13 साल की नाबालिग से वेश्यावृत्ति कराने वाली आरोपी महिला को जमानत पर किया रिहा

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: April 15, 2022 18:46 IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की को वेश्यावृत्ति जैसे अमानवीय कृत्य में ढकेलने और सेक्स रैकेट चलाने वाली महिला को तथ्यों के आधार पर जमानत दे दी है। जबकि नाूालिग लड़की की ओर से कोर्ट में पेश हुए सरकारी वकील ने आरोपी महिला की जमानत का विरोध किया था।

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ठळक मुद्देआरोपी महिला चेंबूर के श्रमजीवी सोसाइटी में नाबालिग को ले जाकर सेक्स रैकेट चलाती थी आरोपी महिला पुरुषों के कथित मनोरंजन के बदले नाबाविग को प्रति ग्राहक 800 रुपये देती थीकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुुए आरोपी महिला को जमानत पर रिहा कर दिया

मुंबई: नाबालिग लड़की को वेश्यावृत्ति जैसे अमानवीय कृत्य में ढकेलने और सेक्स रैकेट चलाने वाली महिला को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। जबकि आरोपी महिला के कारण सेक्स रैकेट के चंगुल में फंसी और एचआईवी पॉजिटिव होने वाली लड़की ने इस जमानत का विरोध किया था।

इस मामले में सरकारी वकील का कहना था कि एक सामाजिक कार्यकर्ता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि गोवंडी की एक 13 साल की नाबालिग लड़की के साथ चेंबूर के श्रमजीवी सोसाइटी में सेक्स रैकेय चलाया जा रहा है। जिसके आधार पर पुलिस ने श्रमजीवी सोसाइटी के एक घर पर छापेमारी की तो एक नाबालिग लड़की को वहां से आपत्तिजनक अवस्था में पाया गया था।

छापेमारी के बाद नाबालिग ने पुलिस में जो बयान दर्ज कराया था, उसके मुताबिक यास्मीन मोहम्मद हुसैन उर्फ ​​यास्मीन विजय यादव नाम की आरोपी महिला उसे चेंबूर में ले जाकर मोबाइल पर अश्लील फिल्में दिखाती थी और पुरुषों के कथित मनोरंजन के बदले प्रति ग्राहक 800 रुपये देती थी।

मामले में पुलिस ने नाबालिग के बयान को आधार बनाते हुए साल 2020 में मामला दर्ज करके आरोपी महिला विजय यादव समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट में यादव की जमानत याचिका पर उसकी ओर से बहस करते हुए वकील सना रईस खान ने कोर्ट में तर्क दिया कि चूंकि इस मामले की जांच पुलिस उप-निरीक्षक को सौंपी गई थी, जबकि ह्यूमन ट्रैफिकिंग एक्ट की धारा 13 के अनुसार, स्पष्ट निर्देश है कि ऐसे मामलों में जांच केवल वरिष्ठ निरीक्षक के द्वारा ही की जा सकती है। लिहाजा प्रावधानों के अनुसार जांच के नियमों का उल्लंघन किया गया है।

इसके अलावा आरोपी महिला विजय यादव की ओर से खान ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस ने 3 अप्रैल 2020 को यादव को नेहरू नगर पुलिस स्टेशन में अवैध तरीके से बिना किसी लिखापढ़ी के 10 घंटे तक अवैध हिरासत में रखा और कोर्ट में उसकी गिरफ्तारी 4 अप्रैल 2020 को दिखाई। जिससे यादव की गिरफ्तार भी सीआरपीसी की धारा 46 (4) और अनुच्छेद 22 के प्रावधान का उल्लंघन किया था।

वकील सना रईस खान ने हाईकोर्ट से यह भी कहा कि पुलिस के मुताबिक जिस कमरे वेश्यावृत्ति हो रही थी, उससे भी यादव का कोई संबंध नहीं है। वह कमरा विजय यादव के पति के नाम पर है और पुलिस की चार्जशीट में लिखा है कि नाबालिग लड़की विजय यादव के संपर्क में आने से पहले से वेश्यावृत्ति के धंधे में जुड़ी थी, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि यादव ने पीड़िता को वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया।

वहीं सरकारी पक्ष के वकील ने आरोपी महिला विजय यादव के कृत्य को गंभीर बताते हुए यादव के वकील सना रईस खान के हर तर्कों का विरोध करते हुए जमानत दिए जाने का कड़ा विरोध किया।

अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में कहा गया,  “पीड़िता की उम्र 13 साल की है और पुलिस ने विजय यादव के घर पर छापा मारकर उसे सेक्स रैकेट से आजाद कराया है। आरोपी ने ही उसे सेक्स व्यापार में ढकेला है। वो किराये का कमरा लेकर वहां पर अपने सेक्स रैकेट का संचालन कर रही थी।"

सरकारी वकील ने कहा कि विजय यादव और उसका पति दोनों इस धंधे में भागीदार थे, जबकि पकड़े गये अन्य तीन आरोपी ग्राहकों को लेाने का काम करते थे। चूंकि विजय यादव राजस्थान की रहने वाली है, इसलिए हो सकता है कि जमानत पर रिहा होने के बाद वो मुंबई से फरार भी हो सकती है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में पोक्सो जज अनीस खान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विजय यादव की जमानत को मंजूर करते हुए कहा, “कोर्ट में पेश किये गये रिकॉर्ड के मुताबिक चेंबूर के जिस श्रमजीवी सोसाइटी में सेक्स रैकेट चल रहा था, वह कमरा राहुल नाम का है। जिसे विजय यादव के पति ने किराये पर लिया था जो पहले से ही जमानत पर रिहा है।”

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा हालांकि यह अपराध गंभीर है और इसमें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। लेकिन चूंकि मामले में जांच खत्म हो गई है और चार्जशीट भी दायर हो चुकी है और तथ्य बता रहे हैं कि जुर्म में महिला विजय यादव की भूमिका मुख्य न होकर सीमित थी। इसलिए कोर्ट आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश देती है। 

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