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अक्टूबर में प्रचलित मुद्रा की लेनदेन में आई गिरावट, डिजिटल पेमेंट की ओर लोगों का रुझान बढ़ा

By आकाश चौरसिया | Updated: November 23, 2023 17:07 IST

एसबीआई रिपोर्ट की मानें तो अक्टूबर, 2023 में त्योहारी मौसम के समय, यूपीआई से 1,36,600 करोड़ रुपये के 85.3 करोड़ लेन-देन में वृद्धि हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि डिजिटल यात्रा की सफलता मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था को औपचारिक और डिजिटल बनाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे अथक प्रयास के कारण है।

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ठळक मुद्देइकोरैप रिपोर्ट में बताया कि दूसरी बार लगातार त्योहारी मौसम में प्रचलन मुद्रा में गिरावट इस कारण उपभोक्ता त्योहार की खरीदारी के लिए डिजिटल भुगतान की ओर रुझान बढ़ा2023 में UPI से 1,36,600 करोड़ रुपये के 85.3 करोड़ लेन-देन में वृद्धि

नई दिल्ली: एसबीआई ने अपनी इकोरैप रिपोर्ट में बताया कि दूसरी बार लगातार त्योहारी मौसम में प्रचलन मुद्रा में गिरावट आई है। इस कारण उपभोक्ता त्योहार की खरीदारी के लिए डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ रहे हैं। 

इकोरैप रिपोर्ट की मानें तो अक्टूबर, 2023 में त्योहारी मौसम के समय, यूपीआई से 1,36,600 करोड़ रुपये के 85.3 करोड़ लेन-देन में वृद्धि हुई। रिपोर्ट में कहा गया कि डिजिटल यात्रा की सफलता मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था को औपचारिक और डिजिटल बनाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे अथक प्रयास के कारण है।

इसके अलावा, यूपीआई, वॉलेट और पीपीआई जैसी इंटरऑपरेबल भुगतान प्रणालियों ने डिजिटल रूप से पैसे ट्रांसफर करना सरल और सस्ता बना दिया है, यहां तक ​​कि उन लोगों के लिए भी जिनके पास बैंक खाते नहीं हैं,'' इसमें कहा गया है।

प्रचलित मुद्रा में दिवाली के दौरान आई कमीरिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 20 सालों में दिवाली के दौरान प्रचलन में मुद्रा की गतिविधि का भी विश्लेषण किया गया है। प्रचलित मुद्रा में 2022 और 2023 दोनों में क्रमशः लगभग 7,600 करोड़ रुपये और 5,900 करोड़ रुपये की गिरावट देखी गई, जबकि यह 2021 में बढ़ी, जो कि कोविड-19 महामारी का वर्ष था। इससे पहले, 2009 में वैश्विक वित्तीय संकट के कारण दिवाली सप्ताह के दौरान प्रचलित मुद्रा में मामूली गिरावट आई थी।

इकोरौप रिपोर्ट प्रचलित मुद्रा पर पिछले 20 साल से दिवाली के दौरान खरीददारी पर नजर रख रहा है।  कोविड-19 के समय साल  2021 में मामूली बढ़ोतरी देखी गई थी, लेकिन 2022 और 2023 में लगातार इसकी रफ्तार थोड़ी ठहर गई और इसमें 7 हजार 600 करोड़ और 5900 करोड़ रुपये की कमई देखी गई थई। 

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