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ब्लॉग: लड़ाई में आया यह ठहराव पूर्ण युद्धविराम में बदलना चाहिए

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: November 24, 2023 11:47 IST

हमास और इजराइल के बीच युद्ध का प्रभाव भी विश्वव्यापी है।

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हमास और इजराइल युद्ध में डेढ़ महीने से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बाद दोनों पक्ष युद्ध विराम के लिए राजी हो गए हैं। एक बड़े घटनाक्रम में इजराइल के मंत्रिमंडल ने हमास के साथ चार दिन के युद्ध विराम को मंजूरी दे दी है जिससे युद्धग्रस्त गाजा में लड़ाई अस्थायी रूप से रुक जाएगी।

समझौते के अंतर्गत हमास गाजा में बंधक बनाए गए लगभग 240 लोगों में से 50 को रिहा करेगा। इजराइल 10 बंधकों के बदले एक दिन का युद्ध विराम और बढ़ा देगा। इजराइल ने गाजा में अतिरिक्त ईंधन और मानवीय सहायता की बड़ी खेप भेजने की भी अनुमति दे दी है।

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि युद्ध विराम की अवधि समाप्त हो जाने पर उनका देश हमास के खिलाफ अभियान जारी रखेगा। इजराइल और हमास के बीच चल रहे संघर्ष में अब तक सीमा के दोनों तरफ सैकड़ों की संख्या में लोगों की मौत हो चुकी है। सवाल किया जा सकता है कि आखिर डेढ़ महीने बाद समझौता क्यों हुआ? 7 अक्तूबर को हमास ने अचानक हमला कर 200 से ज्यादा इजराइली समेत कई देशों के नागरिकों को बंधक बना लिया था।

डेढ़ महीने के बाद भी इन बंधकों की रिहाई न होने के बाद इनके परिजन विरोध प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतर आए हैं। प्रभावित परिवारों ने इजराइली युद्ध कैबिनेट के सदस्यों से मुलाकात करने के बाद ‘उन्हें घर लाएं’ नाम का एक अभियान चलाया। इजराइली सेना द्वारा की गई बमबारी और उसके बाद जमीनी आक्रमण ने गाजा में मानवीय संकट पैदा कर दिया है। यहां हर दिन खराब होती मानवीय स्थिति के चलते इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ रहा है।

गाजा में भोजन, पानी, ईंधन और दवाओं की बेहद कमी है। गाजा पट्टी में जो लोग प्रभावित हो रहे हैं, वे सामान्य लोग हैं। हमास द्वारा फैलाई गई दहशत के मद्देनजर इजराइल का गुस्सा समझ में आता है, लेकिन इसके जवाब में इजराइल सामूहिक रूप से गाजा के निर्दोष लोगों को सजा दे रहा है। जानकारों का मानना है कि हमास फिर से संगठित होने के लिए किसी भी युद्धविराम का इस्तेमाल करना चाहता है। वहीं, दूसरी ओर इजराइल इस स्थिति में आकर अब जवाबी कार्रवाई नहीं रोकना चाहेगा।

उसने हमास को जड़ से मिटाने की कसम खाई है। इजराइल-हमास युद्ध ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। युद्ध का असर सिर्फ इजराइल और फिलिस्तीन तक सीमित नहीं रह जाएगा, बल्कि आज के ग्लोबल इकोनॉमी के दौर में दुनियाभर के देश इससे प्रभावित होंगे। किसी भी युद्ध का प्रभाव विश्वव्यापी होता है।

हमास और इजराइल के बीच युद्ध का प्रभाव भी विश्वव्यापी है। चाहे अमेरिका हो, यूरोप हो, मिडिल ईस्ट हो या साउथ एशिया, सब देशों पर इस युद्ध का प्रभाव पड़ रहा है। तो ऐसे समय में संतुलित और व्यवस्थित उपाय ढूंढ़ने की कोशिश की जानी चाहिए। इजराइल और हमास का एक समझौते पर पहुंचना बताता है कि खूनी लड़ाई के बीच भी दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ संवाद के लिए तैयार हैं।

उन्हें इस समझौते से पैदा हुए माहौल का फायदा उठाते हुए लड़ाई में आए इस ठहराव को आगे बढ़ाकर एक पूर्ण युद्धविराम में बदलना चाहिए। सभी बंधकों को रिहा कराने, फिलिस्तीनियों को स्थायी राहत प्रदान करने और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को शांत करने का यही एकमात्र तरीका है।

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